दिल्ली।एजेंसी (AkhandBharatHNKP.Com) दिल्ली ब्लास्ट में 15 लोगों की मौत हुई है, 20 से ज्यादा लोग जख्मी हैं। इस मामले में सुरक्षा एजेंसियों को शू बम के इस्तेमाल का शक है। सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसियों को विस्फोट वाली कार से एक जूता मिला है। जांच में अमूर्त ट्राइएसीटोन ट्राइपरॉक्साइड (TATP) और अमोनियम नाइट्रेट के ट्रेस मिले, जिन्हें शुरुआती सुराग माना जा रहा है।

अमूर्त ट्राइएसीटोन ट्राइपरॉक्साइड (TATP) एक बेहद खतरनाक और सेंसिटिव विस्फोटक माना जाता है, जिसे आतंकी अक्सर इस्तेमाल करते हैं। यह मामूली झटके, रगड़ या थोड़ी सी गर्मी से भी फट सकता है।NIA ने रविवार को बताया कि कार चला रहा डॉ. उमर नबी एक आत्मघाती हमलावर (सुसाइड बॉम्बर) था। यह पहली बार है, जब किसी सुरक्षा एजेंसी ने ऑफिशियल तौर पर इसकी पुष्टि की है। इससे यह तय हो गया है कि ब्लास्ट सुसाइड अटैक ही था।
क्या होता है शू बॉम्ब
शू बॉम्ब एक ऐसा विस्फोटक उपकरण होता है, यह आमतौर पर जूते के सोल (तलवे) या अंदर की गद्दी में विस्फोटक सामग्री में छिपाकर बनाया जाता है। इसमें कोई डेटोनेशन सिस्टम लगाया जा सकता है । इसका उद्देश्य सुरक्षा जांच को धोखा देकर विस्फोटक को विमान, भीड़ वाली जगह या किसी संवेदनशील जगह तक ले जाना होता है।
दिल्ली ब्लास्ट : 4 जगहों पर बनी थी विस्फोट की योजना, दो-दो के बनाए थे गिरोह
जसीर आतंकी उमर को टेक्निकल सपोर्ट देता था
एनआईए NIA ने जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर से आतंकी उमर के एक और साथी जसीर बिलाल वानी उर्फ दानिश को गिरफ्तार किया। आरोप है कि जसीर आतंकी उमर को टेक्निकल सपोर्ट देता था। विस्फोट के लिए ड्रोन मॉडिफाई करता था और रॉकेट बनाने की भी कोशिश की थी।एनआईए NIA के मुताबिक जसीर आतंकी उमर का प्रमुख सहयोगी है। वह अनंतनाग के काजीकुंड का रहने वाला है। दिल्ली ब्लास्ट में इसकी सक्रिय भूमिका रही है। डॉ. उमर के साथ मिलकर ब्लास्ट की प्लानिंग में शामिल था।
