रायपुर (AkhandBharatHNKP.Com)। पिछले पांच सालों में 2 सौ करोड़ रूपए खर्च करने के बाद भी छत्तीसगढ़ के रायपुर, भिलाई और कोरबा शहर की हवा की गुणवत्ता सुधर नहीं पाई है। बता दें कि यहाँ पर प्रदूषण की मात्रा तय मानक से लगभग 15 माइक्रोमीटर ज्यादा है। यहां हवा की क्वालिटी सुधारने के लिए इन तीनों निकायों के इंजीनियरों को हैदराबाद में ट्रेनिंग दी गई है।
15वें वित्त आयोग के अंतर्गत एनसीएपी (नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम) शहरों में प्रदेश के तीन शहर रायपुर, भिलाई और कोरबा को शामिल किया गया है। इन शहरों में हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए एक मॉनिटरिंग सिस्टम बनाया गया है। बताया गया है कि प्रदूषित स्थानों पर पब्लिक आउटरीच एक्टिविटी कराई जा रही है। प्रशासन अकादमी निमोरा में ट्रेनिंग, खराब सड़कों की पैच रिपेयरिंग, पेवर ब्लॉक के कार्य, वृक्षारोपण, सड़कों की लगातार सफाई के साथ ही शहरी इलाकों में कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन संयंत्र चलाया जा रहा है। इसी तरह वॉल पेंटिंग, जन जागरूकता आदि के माध्यम से इन्फॉर्मेशन, एजुकेशन एंड कम्युनिकेशन किया जा रहा है।
इस वजह से बढ़ रहा प्रदूषण
हवा की क्वालिटी खराब होने में मुख्य रूप से औद्योगिक गतिविधियों, निर्माण स्थलों, वाहनों की संख्या, कृषि और कोयला या लकड़ी जलाना जिम्मेदार है। साथ ही प्राकृतिक स्रोतों जैसे जंगलों की आग और पराग कणों से भी आते हैं।
केन्द्र सरकार साफ हवा के लिए देगा 301.69 करोड़
छत्तीसगढ़ की प्रमुख शहरों की हवा सुधारने के लिए केंद्र सरकार 301 करोड़ रुपए का वायु अनुदान देगा। यह राशि रायपुर, कोरबा, दुर्ग और भिलाई की एयर क्वालिटी सुधारने के लिए दिया जाएगा। रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल की पहल पर केंद्र सरकार ने यह राशि देने जा रही है। इनमें से अकेले रायपुर शहर को 151.59 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। जो राजधानी के पर्यावरण सुधार के लिए अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय पैकेज है। बता दें कि कोरबा शहर को मंत्रालय की प्रदूषण नियंत्रण योजना के तहत सहायता दी जाती है, जबकि रायपुर, दुर्ग और भिलाई जैसे 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों को 15वें वित्त आयोग के वायु गुणवत्ता अनुदान से वित्त पोषित किया जाता है।
कई तरह की बीमारियों का कारण
हवा में मौजूद धूल, गर्दा और विभिन्न तत्वों के छोटे कण होते हैं जो सांस लेने के दौरान फेफड़ों में जाकर स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ये कण श्वसन संबंधी समस्याओं जैसे खांसी, अस्थमा और ब्रोंकाइटिस को बढ़ा सकते हैं, और लंबे समय तक संपर्क में रहने से हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है। ये श्वास नली को भी प्रभावित करते हैं।
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