Friday, February 6, 2026

कैसे पता लगाएं कि आपके मोबाइल से डेटा चोरी हो रहा है?

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आपके मोबाइल फ़ोन में ऐसे ऐप हो सकते हैं जो वाक़ई आप पर निगरानी रखकर आपका पर्सनल डेटा चुरा रहे हों? ऐसे में ख़ुद को कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है। साइबर एक्सपर्ट कहते हैं, ऐप्स प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरीक़े से हमारा डेटा लेते हैं। प्रमुख रूप से लोकेशन, कॉन्टेक्ट लिस्ट, कैमरा, कॅाल लॅाग्स, फ़ोटोज़, हेल्थ डेटा, मैसेज, माइक्रोफ़ोन मुख्य तौर पर शामिल हैं।

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आपके मोबाइल से डेटा चोरी तो नहीं हो रहा। इस बात का पता लगाने के लिए आपको ऐप की परमिशन में जाना चाहिए और ऐप की परमिशन को रिव्यू करें, और खुद से पूछिए कि क्या उस ऐप की परमिशन उसके मुख्य उद्देश्य की पूर्ति करने के लिए ज़रूरी है। अगर हाँ, तो उन परमिशन को बरक़रार रखिए और अगर नहीं, तो उन परमिशन को हटा दीजिए।

ऐप इंस्टॉल करते समय कस्टमर रिव्यू  जरुर पढ़े

साइबर सिक्‍योरिटी एक्‍सपर्ट कहते हैं, किसी भी ऐप को डाउनलोड करने से पहले आपको उसकी टर्म्स एंड कंडीशंस के साथ-साथ प्राइवेसी पॉलिसी को भी ध्यान से पढ़ना चाहिए। यह देखना ज़रूरी है कि जो भी ऐप इंस्टॉल कर रहे हैं, वह आपके डेटा को किस तरह स्टोर कर इस्तेमाल करेगा। जब आप पूरी तरह संतुष्ट हो जाएं, तभी डाउनलोड करिए।

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किसी भी ऐप को इंस्टॉल करने से पहले उसके बारे में जानने का एक अच्छा तरीक़ा होता है कस्टमर रिव्यू पढ़ना, कहीं भी ख़तरे की घंटी नज़र आते ही उस ऐप से दूरी बना लेनी चाहिए। ऐप आपके डेटा को इकट्ठा कर मॉनिटाइज़ करता हैं। ऐप परमिशन लेकर आपका डेटा लेते हैं। किसी भी ऐप को डाउनलोड करते वक्त अंधाधुंध परमिशन देने से सारा डेटा ऐप्स के पास चला जाता हैं।

डेटा इकॉनमी का दौर आप सावधान नहीं हुए तो.. 

एक बार आपका डेटा इक्ट्ठा होने के बाद आपकी प्रोफ़ाइल बन जाती है।आपको किन चीज़ों का शौक है, क्या आपको खाने-पीने, पहनने में पसंद हैं। सब कुछ प्रोफ़ाइल से समझ लिया जाता है। कंपनियां इस डेटा को शेयर करने के साथ अन्य कंपनियों को डेटा बेचती हैं। इस डेटा के आधार पर विज्ञापन और मार्केटिंग कंपनियों के कारोबार में बढ़ोतरी होती है। यह डेटा इकॉनमी का दौर है, जिसमें डेटा ही करेंसी है. अगर आप सावधान नहीं हुए, तो आपको टारगेट भी किया जा सकता है।

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मोबाइल आपकी सारी बातें सुनता है

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आपका फ़ोन आपकी सारी बातें सुनता है। अगर मैं कहूं कि मुझे गोवा जाना है, तो मुझे गोवा संबंधी ऑफ़र आने लग जाएंगे। यह कस्टमाइज़्ड डेटा एडवरटाइज़िंग हैं, जिसमें डेटा ही रॉ मैटेरियल है। इसमें कंपनिया इच्छुक होती हैं, जिसके बदले आपको कस्टमाइज़ सर्विस दी जाती है और उसके बदले आपका डेटा लिया जाता है। ऐसे में आप ही उनके प्रोडक्ट बन जाते हैं।

संचार साथी ऐप,सरकार का फैसला वापस

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भारत सरकार ने हाल ही में यह निर्देश दिया था कि मार्च 2026 से हर नए स्मार्टफ़ोन में संचार साथी ऐप प्री-इंस्टॉल होगा. साथ ही पुराने फ़ोनों में इसे सॉफ़्टवेयर अपडेट के ज़रिए भेजा जाएगा। विपक्ष की पार्टी ने संचार साथी ऐप को असंवैधानिक और नागरिकों की निगरानी का टूल बताया, जिसके बाद केंद्र सरकार ने संचार साथी ऐप को ज़रूरी तौर पर प्री-इंस्टॉल करने के अपने फ़ैसले को वापस ले लिया है। संचार मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी है।

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