कोरबा (AkhandBharatHNKP.Com)। वेदांता लिमिटेड द्वारा अपने अनिवार्य बिजनेस रिस्पॉसिलिबिटी एंड सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट (बीआरएसआर) वित्त वर्ष 2024-25 में मानवाधिकार उल्लंघन, भ्रष्टाचार मामलों के दमन व भ्रामक ईएसजी खुलासों के माध्यम से निवेशकों, नियामकों और सरकार को गुमराह किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। पूर्व कैबिनेट मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने इस संबंध में वेदांता लिमिटेड पर यह आरोप लगाते हुए भारतीय प्रतिभूति व विनिमय बोर्ड (सेबी) को औपचारिक शिकायत प्रस्तुत करते हुए फारेंसिक जांच व सख्त कार्रवाई की मांग की है।
पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने वेदांता लिमिटेड पर आरोप लगाते हुए कहा कि बीआरएसआर में सुनियोजित झूठ और धोखाधड़ी की गई है। वेदांता लिमिटेड ने सेबी (एलओडीआर) रेग्युलेशन 2015 के अंतर्गत अनिवार्य बीआरएसआर में जानबूझकर झूठे भ्रामक और तथ्यहीन प्रकटीकरण किए हैं। जो सीधे तौर पर मटेरियल मिस प्रेजेंटेशन की श्रेणी में आते हैं। वेदांता ने बीआरएसआर में यह दावा किया है कि कर्मचारियों व श्रमिकों के लिए प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था मौजूद है। इसके लिए ऐथिक्स पाइंट पोर्टल सक्रिय है। उन्होंने बताया कि इसी पोर्टल में 171 शिकायतें दर्ज की गई। शिकायतें कार्यस्थल पर भेदभाव, जबरन श्रम व प्रतिशोधात्मक कार्रवाई से संबंधित थी। किसी भी शिकायत पर न जवाब मिला न निवारण, बाद में पूरा पोर्टल ही बंद/ब्लॉक कर दिया गया। इसके बावजूद बीआरएसआर में उसी पोर्टल को सक्रिय व्यवस्था बताना सीधा-सीधा धोखाधड़ी पूर्ण प्रकटीकरण है।

आरोपी कर्मचारी महीनों तक रहे फरार
श्री जयसिंह ने आगे बताया कि वेदांता ने बीआरएसआर में यह घोषित किया कि कंपनी या उसकी सहायक इकाईयों में कंपनी या उसकी सहायक कंपनियों में किसी कर्मचारी, श्रमिक के विरूद्ध भ्रष्टाचार या रिश्वत के मामलों में कोई कार्रवाई नहीं हुई। जबकि तथ्य है कि वेदांता की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी बालको के कर्मचारियों के विरूद्ध आईपीसी 420, 468, 471, 120बी जैसी गंभीर धाराओं में तीन एफआईआर दर्ज है। आरोपी कर्मचारी महीनों तक फरार रहे। प्रबंधन ने पुलिस को भ्रामक जानकारी दी। कोई विभागीय कार्रवाई भी नहीं हुई। जमानत के बाद आरोपियों को पूरा वेतन, बोनस और पीएफ लाभ दिए गए।
मानवाधिकार शिकायत के आंकड़ों में फर्जीवाड़ा
बीआरएसआर ने यह दर्शाया कि कार्यस्थल पर भेदभाव और जबरन अनैच्छिक श्रम की शिकायतें शून्य हैं। तबकि सच्चाई यह है कि 171 शिकायतें दर्ज की गई। सभी को सिस्टम द्वारा एकनॉलेजमेंट और यूनिक रिफेस नंबर मिले। बाद में पोर्टल बंद कर साक्ष्य दबाने का प्रयास किया गया। पूर्व मंत्री ने सेबी से मांग की है कि वेदांता की बीआर एसआर वित्तीय वर्ष 2024-25 की फारेंसिक जांच कराई जाए। कंपनी को संशोधित बीआरएसआर पुन: दाखिल करने का आदेश किया जाए। सेबी एक्ट व एलओडीआर रेग्युलेशन के तहत दंडात्मक कार्रवाई व कंपनी के ऑफिसर बोर्ड आफ डायरेक्टस और प्रोवाइडर की भूमिका की जांच सहित निवेशकों व बाजार की निष्पक्षता की रक्षा के लिए कठोर आदेश पारित करने की मांग की गई है।
बालको से उत्पन्न प्रदूषण मानक दर से कई गुना अधिक : जयसिंह अग्रवाल




