कुत्ते इंसानों के डर को पहचान लेते हैं : सुप्रीम कोर्ट

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      • कोर्ट ने नगर पालिकाओं में शेल्टर की कमी और कुत्तों के व्यवहार पर चर्चा की

          नई दिल्ली (एजेंसी)। सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों पर लगातार दूसरे दिन सुनवाई हुई, जो करीब ढाई घंटे तक चली। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कुत्तों के व्यवहार, उनके शेल्टर और नगर पालिकाओं की जिम्मेदारी पर विस्तार से चर्चा की।

          सुप्रीम कोर्टसुनवाई में जस्टिस नाथ ने कहा कि कुत्ते इंसानों के डर को पहचान लेते हैं और इसी कारण काटते हैं। इस पर कुत्तों के पक्ष में दलील दे रहे एक वकील ने इसका खंडन किया, जिस पर जस्टिस ने मजाकिया अंदाज में कहा अपना सिर मत हिलाइए यह मैं अपने व्यक्तिगत अनुभव से बोल रहा हूं। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि राज्यों द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों में यह नहीं बताया गया कि नगर पालिकाओं की तरफ से कितने शेल्टर चलाए जाते हैं। देश में केवल 5 सरकारी शेल्टर हैं, जिनमें प्रत्येक में लगभग 100 कुत्ते रखे जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता है।

          …. तो क्या बिल्लियां ले आएं?

          एनिमल वेलफेयर की तरफ से दलील दे रहे एडवोकेट सीयू सिंह ने कुत्तों को हटाने या शेल्टर होम भेजने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि कुत्तों को हटाने से चूहों की आबादी बढ़ सकती है। कोर्ट ने मजाकिया अंदाज में जवाब दिया, ‘तो क्या बिल्लियां ले आएं? इस मामले पर पिछले सात महीनों में छह बार सुनवाई हो चुकी है। पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और रेलवे स्टेशनों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दिया था। साथ ही कोर्ट ने कहा था कि इन जानवरों को निर्धारित शेल्टर में ट्रांसफर किया जाए।

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