Friday, February 6, 2026

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला, 14 साल पहले नियुक्त 67 सब-इंजीनियरों की नियुक्ति निरस्त

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बिलासपुर (AkhandBharatHNKP.Com)। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में वर्ष 2011 में नियुक्त किए गए 67 सब-इंजीनियर (सिविल) की नियुक्तियों को अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद योग्यता के मापदंडों में बदलाव नहीं किया जा सकता।

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डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि यदि भर्ती विज्ञापन में शैक्षणिक योग्यता के लिए कोई अंतिम तिथि निर्धारित की गई है, तो अभ्यर्थी के पास उसी तारीख तक आवश्यक डिग्री या डिप्लोमा होना अनिवार्य है। चयन की तारीख को योग्यता निर्धारण का आधार नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि बैकडोर से की गई नियुक्तियों को उसी रास्ते वापस जाना होगा। कोर्ट के अनुसार, वर्ष 2011 की भर्ती प्रक्रिया के दौरान ऐसे 89 अभ्यर्थी पाए गए, जिनके पास आवेदन की अंतिम तिथि 23 मार्च 2011 तक आवश्यक शैक्षणिक योग्यता नहीं थी।

ये है पूरा मामला

वर्ष 2011 में ग्रामीण अभियांत्रिकी सेवा के तहत सब-इंजीनियर के 275 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। आरोप है कि विज्ञापन की शर्तों का उल्लंघन करते हुए विभाग द्वारा 275 के बजाय 383 नियुक्तियां कर दी गईं। इनमें 89 ऐसे अभ्यर्थी शामिल थे, जिनके पास निर्धारित अंतिम तिथि तक जरूरी डिग्री या डिप्लोमा नहीं था। इस भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देते हुए रवि तिवारी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हालांकि, सिंगल बेंच ने याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील की गई, जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अब यह अहम फैसला सुनाया है।

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