Friday, February 13, 2026

सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी, फिल्म घूसखोर पंडत नाम बदले बिना नहीं होगी रिलीज

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नई दिल्ली (एजेंसी)। सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म घूसखोर पंडत के नाम को लेकर फिल्ममेकर नीरज पांडे और नेटफ्लिक्स को कड़ी चेतावनी दी है। कोर्ट ने साफ कहा कि किसी भी सामाजिक समुदाय को बदनाम करने वाले नाम की अनुमति नहीं दी जा सकती।

सुप्रीम कोर्टजस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ब्राह्मण समाज की ओर से दायर जनहित याचिका की सुनवाई कर रही थी। अदालत ने निर्देश दिया कि फिल्म का नया नाम सामने आने तक इसे रिलीज नहीं किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड और फिल्म निर्माता नीरज पांडे को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने नीरज पांडे से फिल्म का नया नाम बताने और एक हलफनामा दाखिल करने को कहा है जिसमें स्पष्ट किया जाए कि फिल्म किसी सामाजिक वर्ग का अपमान नहीं करती। मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी को होगी।

3 फरवरी को जारी हुआ था टीजर

नेटफ्लिक्स ने 3 फरवरी 2026 को मनोज बाजपेयी की फिल्म घूसखोर पंडत का टीजर जारी किया। इसमें मनोज बाजपेयी सीनियर इंस्पेक्टर अजय दीक्षित के किरदार में दिखाई दिए जिन्हें दिल्ली में पंडित के नाम से जाना जाता है। फिल्म में उनका किरदार भ्रष्ट और विवादित पुलिस अधिकारी का है। टीजर के रिलीज होते ही फिल्म के नाम को लेकर विवाद शुरू हो गया और मामला जल्द ही अदालत तक पहुँच गया।

ब्राह्मण समाज का विरोध

ब्राह्मण समाज ने अलग-अलग जगहों पर इस फिल्म के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। मुंबई के वकील आशुतोष दुबे का कहना है कि पंडत जैसे सम्मानजनक शब्द को भ्रष्टाचार से जोडऩा गैर-जिम्मेदाराना है और इससे पूरे समुदाय की गरिमा को ठेस पहुँचती है। वकील का आरोप है कि फिल्म जानबूझकर एक समुदाय की छवि को खराब करने का प्रयास कर रही है और यह केवल क्रिएटिव फ्रीडम का मामला नहीं है। उनका कहना है कि फिल्म का नाम केवल सनसनी फैलाने के इरादे से रखा गया, जिसमें सामाजिक संवेदनाओं की अनदेखी की गई। ब्राह्मण समाज ने फिल्म का नाम बदलने की भी मांग की है।

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