स्व-सहायता समूह की महिलाओं से किया संवाद, हाथी मित्र दल को मोटरसाइकिल और सुरक्षा किट का किया वितरण

कोरबा (AkhandBharatHNKP.Com)। छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन, परिवहन एवं सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने अपने दो दिवसीय कोरबा प्रवास के दौरान वन संरक्षण, वन आधारित आजीविका, वन्यजीव सुरक्षा और मानव-हाथी संघर्ष की रोकथाम से जुड़ी गतिविधियों का जायजा लिया। उन्होंने वन विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी लेते हुए स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।

वनमंत्री ने पाली विकासखंड के ग्राम डोंगानाला स्थित वनौषधि प्रसंस्करण केंद्र का निरीक्षण किया। यहां उन्होंने हरि बोल स्व-सहायता समूह की महिलाओं से बातचीत कर वनौषधियों के संग्रहण, प्रसंस्करण और उत्पाद निर्माण की जानकारी ली। महिलाओं ने वन संसाधनों से तैयार किए जा रहे विभिन्न उत्पादों के बारे में मंत्री को बताया। केदार कश्यप ने महिलाओं के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि वन क्षेत्रों में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का स्थानीय स्तर पर बेहतर उपयोग कर ग्रामीणों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है। इस दौरान कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल, अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ, प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरुण कुमार पाण्डेय सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, वन प्रबंधन समितियों के सदस्य, हाथी मित्र दल और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
समूह को 3.72 लाख रुपये की सहायता
वनमंत्री ने समूह द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों का अवलोकन किया और महिलाओं के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि वनौषधियों और अन्य वन उत्पादों का स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण करने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और महिला समूहों की आय बढ़ेगी। परिसर में सुरक्षा व्यवस्था के लिए लिंक फेंसिंग की मांग पर उन्होंने आवश्यक पहल का आश्वासन दिया। साथ ही स्व-सहायता समूह को 3 लाख 72 हजार रुपये का चेक प्रदान कर प्रोत्साहित किया।
हाथी नियंत्रण केंद्र पहुंचकर ली जानकारी
इसके बाद वनमंत्री पोड़ी-उपरोड़ा विकासखंड के बुका स्थित वन विश्राम गृह पहुंचे, जहां जनप्रतिनिधियों और स्थानीय कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। इसके बाद वे चोटिया स्थित हाथी नियंत्रण केंद्र पहुंचे। यहां उन्होंने मानव-हाथी संघर्ष की रोकथाम और वन्यजीव सुरक्षा के लिए काम कर रहे हाथी मित्र दल के सदस्यों से मुलाकात की। वनमंत्री ने दल को मोटरसाइकिल और सुरक्षा किट प्रदान की, ताकि जंगलों में निगरानी और हाथियों की गतिविधियों की सूचना समय पर मिल सके।
ग्रामीणों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के निर्देश
केदार कश्यप ने हाथी मित्र दल से क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही और मानव-हाथी संघर्ष की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए वन विभाग, प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। समय पर सूचना और सतर्क निगरानी से संभावित घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। उन्होंने वन प्रबंधन समितियों के सदस्यों से भी चर्चा की और वन एवं वन्यजीव संरक्षण में स्थानीय समुदाय की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जंगलों के आसपास रहने वाले ग्रामीणों के अनुभव और सहयोग से वन विभाग की गतिविधियों को और प्रभावी बनाया जा सकता है। वनमंत्री ने हाथी मित्र दल और वन प्रबंधन समितियों को वन्यजीवों के संरक्षण के साथ ग्रामीणों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लगातार निगरानी और समन्वय के साथ काम करने के लिए प्रेरित किया।
प्रकृति और प्राकृतिक धरोहरों को बचाना हम सभी की जिम्मेदारी : वनमंत्री केदार कश्यप

