14 अक्टूबर को अगली सुनवाई, नगर निगम आयुक्त को सड़क मरम्मत की रिपोर्ट देने के निर्देश
बिलासपुर (AkhandBharatHNKP.Com)। छत्तीसगढ़ में सड़कों की बदहाली को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति कृष्ण राम महापात्र और न्यायमूर्ति संतोष शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि वर्ष 2021 से जनहित याचिका लंबित होने के बावजूद सड़कों की स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है।
सुनवाई के दौरान सामने आया कि सेंदरी-मोपका सड़क अब तक भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को हस्तांतरित नहीं की गई है। इसका संचालन और रखरखाव लोक निर्माण विभाग के जिम्मे है। इस स्थिति पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के रवैये पर सवाल उठाए। वहीं, बिलासपुर-रायपुर सड़क परियोजना को पूरा करने की समय-सीमा बताने के लिए संबंधित अधिकारियों से शपथपत्र मांगा गया है। न्याय मित्र एवं वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव श्रीवास्तव ने शहर की सड़कों की बदहाली का मुद्दा उठाते हुए कहा कि एक भी सड़क ठीक से चलने योग्य नहीं है। उन्होंने पूजा पर्व से पहले मरम्मत नहीं होने पर दुर्घटनाओं की आशंका जताई। नगर निगम की ओर से अधिवक्ता के उपस्थित नहीं होने पर हाईकोर्ट ने आयुक्त को अगली सुनवाई में स्वयं उपस्थित होने या उचित प्रतिनिधि भेजने का निर्देश दिया। ऐसा नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
पांच सड़कों के काम पर लागत का पेंच
नगर निगम की करीब 12 किलोमीटर लंबी पांच प्रमुख सड़कों का डामरीकरण डामर की कीमत बढ़ने और उपलब्धता की समस्या के कारण अटक गया है। लगभग 50 करोड़ रुपये की लागत वाली इन सड़कों में अशोक नगर रोड, साइंस कॉलेज से सब्जी मंडी रोड, अपोलो रोड, स्मृति वन-शनि मंदिर रोड और अरपा अटल पथ शामिल हैं। ठेकेदारों ने लागत संशोधन की मांग की है, जिसका प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
14 अक्टूबर को फिर होगी सुनवाई
हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई 14 अक्टूबर 2026 को तय की है। तब तक नगर निगम आयुक्त को सड़क मरम्मत के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी शपथपत्र के माध्यम से देनी होगी। अब सभी की नजरें अगली सुनवाई पर हैं, जिसमें सड़कों की बदहाली दूर करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी सामने आएगी।
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