एक महीने तक मतदाता सूची पुनरीक्षण के काम में जुटेंगे शिक्षक
रायपुर (AkhandBharatHNKP.Com)। छत्तीसगढ़ में विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत एक बार फिर शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने से स्कूली शिक्षा प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। अभियान के लिए सैकड़ों शिक्षकों को बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऐसे में पहले से शिक्षकों की कमी से जूझ रहे स्कूलों में पढ़ाई और पाठ्यक्रम समय पर पूरा कराने की चुनौती बढ़ सकती है।

विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान करीब एक महीने तक चलने वाला है। इस दौरान बीएलओ के रूप में नियुक्त शिक्षकों को मतदाता सूची से संबंधित कार्यों में समय देना होगा। इससे उनकी नियमित शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित होने की आशंका है। कई स्कूलों में पहले से ही सीमित शिक्षकों के सहारे कक्षाएं संचालित हो रही हैं। कुछ विद्यालयों में एक या दो शिक्षक ही विद्यार्थियों को पढ़ाने की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ऐसे में शिक्षकों की अतिरिक्त प्रशासनिक ड्यूटी से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की चिंता बढ़ गई है।
स्कूलों में एक दिसंबर से छमाही परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं। परीक्षा से पहले पाठ्यक्रम पूरा कराना और विद्यार्थियों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय देना शिक्षकों के लिए जरूरी है। ऐसे समय में बीएलओ की जिम्मेदारी मिलने से पढ़ाई के लिए समय निकालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यदि शिक्षकों का अधिक समय मतदाता सूची पुनरीक्षण के कार्यों में व्यतीत होता है, तो इसका असर कक्षाओं के नियमित संचालन पर भी पड़ सकता है।
शिक्षा और प्रशासनिक कार्यों के बीच संतुलन जरूरी
मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया है, लेकिन इसके साथ विद्यार्थियों की पढ़ाई को भी प्राथमिकता देना जरूरी है। छमाही परीक्षा नजदीक होने के कारण शिक्षकों की ड्यूटी को लेकर चिंता बढ़ गई है। अब चुनौती यह है कि पुनरीक्षण का कार्य भी समय पर पूरा हो और स्कूलों में पढ़ाई की नियमित व्यवस्था भी बनी रहे, ताकि विद्यार्थियों की परीक्षा तैयारी प्रभावित न हो।

