नक्सलवाद की हर निशानी मिटाकर बस्तर को फिर से हँसता-खेलता और खुशहाल बनाना है : अमित शाह
नक्सलमुक्त बस्तर को अब तेज गति से विकास और समृद्धि के पथ पर आगे बढ़ाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प से नक्सलवाद से मुक्त हुआ बस्तर, अब विकास का नया अध्याय लिखने का समय : मुख्यमंत्री साय
दंतेवाड़ा में तीन दिवसीय निःशुल्क दिव्यांगजन कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर का शुभारंभ, 768 दिव्यांगजन होंगे लाभान्वित
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम में हुए शामिल
रायपुर (AkhandBharatHNKP.Com)। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद अब उससे प्रभावित लोगों के घावों पर मरहम लगाना, उनका पुनर्वास करना और उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। नक्सली हिंसा ने पांच दशकों तक बस्तर के गरीब और आदिवासी परिवारों को गहरी पीड़ा दी है। अब बस्तर को हिंसा के प्रभाव से बाहर निकालकर खुशहाल और समृद्ध बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रभावित लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ सरकार के साथ मजबूती से खड़ी है।

अमित शाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में जनसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में चलाए जा रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत दंतेवाड़ा में आयोजित निःशुल्क दिव्यांगजन कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी कार्यक्रम में शामिल हुए। दंतेवाड़ा में 15 से 17 अक्टूबर तक आयोजित तीन दिवसीय शिविर में दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिले के कुल 768 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और विभिन्न सहायक उपकरणों से लाभान्वित किया जाएगा। इनमें दंतेवाड़ा के 509, बीजापुर के 197 और सुकमा के 62 दिव्यांगजन शामिल हैं। शिविर का आयोजन भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर और सहयोगी संस्थाओं के सहयोग से किया जा रहा है।
शिविर में जरूरतमंदों को कृत्रिम अंग, व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, बैसाखी, श्रवण यंत्र और अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अमित शाह ने कहा कि नक्सली हिंसा के दौरान आईईडी विस्फोटों में कई निर्दोष नागरिकों ने अपने हाथ-पैर गंवा दिए। ऐसे लोगों को दोबारा चलने-फिरने और आत्मनिर्भर जीवन जीने में सहायता देना समाज और सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि 5 से 7 अक्टूबर तक जगदलपुर में आयोजित शिविर में 3,600 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए थे। इनमें अकेले बस्तर क्षेत्र के 1,570 से अधिक लोग शामिल थे। उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों से पता चलता है कि नक्सली हिंसा ने क्षेत्र के गरीब और आदिवासी परिवारों को कितनी गहरी चोट पहुंचाई है।
आत्मसमर्पण करने वालों के पुनर्वास के लिए भी प्रयास
अमित शाह ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और विकास से जुड़े प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि लगभग 8,526 लोगों ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें 7,328 लोगों के बैंक खाते खोले गए, 1,620 लोगों को इनामी राशि और 7,882 लोगों को प्रोत्साहन राशि दी गई है। इसके अलावा 455 लोगों को नौकरी तथा 129 लोगों को भूमि आवंटित की गई है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 4,014 आवास उपलब्ध कराए गए हैं। वहीं, 2,308 आदिवासियों को कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया गया है। क्षेत्र में 6,763 नए राशन कार्ड बनाए गए और 2,808 परिवारों को निःशुल्क बिजली उपलब्ध कराई गई है। आवागमन बेहतर बनाने के लिए 372 नई सड़क परियोजनाएं शुरू की गई हैं तथा 670 पुलियों का निर्माण किया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य नक्सल प्रभावित परिवारों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है।
200 से अधिक सुरक्षा शिविर बनेंगे ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’
अमित शाह ने बस्तर के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की जानकारी देते हुए कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान के दौरान स्थापित 500 से अधिक सुरक्षा शिविरों में से 200 से अधिक को ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इन केंद्रों पर सरकारी अधिकारी बैठकर स्थानीय लोगों तक जनकल्याणकारी योजनाओं और आवश्यक सेवाओं को पहुंचाने का काम करेंगे। उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर पहले सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर जोर था, अब वहीं से विकास, जनसेवा और रोजगार से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाया जाएगा। इन केंद्रों के माध्यम से स्थानीय युवाओं और ग्रामीण परिवारों को प्रशिक्षण, रोजगार तथा स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास होगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बताया कि महान जननायक शहीद वीर गुंडाधुर के गांव नेतानार में पहला सेवा डेरा शुरू किया गया है। यहां स्थानीय लोगों को सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही जंगलों में उपलब्ध इमली की पैकेजिंग और पारंपरिक ढेंकी पद्धति से चावल तैयार करने जैसी आजीविका गतिविधियां भी शुरू की गई हैं। आने वाले समय में अन्य सेवा डेरों में भी स्थानीय संसाधनों और जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
नियद नेल्लानार योजना से दूरस्थ गांवों तक पहुंच रहीं सुविधाएं
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संकल्प से छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद की चुनौती से मुक्ति दिलाने में सफलता मिली है। इस अभियान में सुरक्षा बलों के साहस और बस्तर की जनता के सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष में शहीद हुए जवानों और हिंसा में जान गंवाने वाले निर्दोष ग्रामीणों को श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के कारण बस्तर विकास की दौड़ में पीछे रह गया था। अब राज्य सरकार का लक्ष्य इसे देश के विकसित जनजातीय क्षेत्रों में अग्रणी बनाना है। ‘नियद नेल्लानार’ योजना के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 500 से अधिक गांवों में सड़क और बिजली की सुविधाएं पहुंची हैं। घरों तक नल से जल पहुंचाने और दूरसंचार सेवाओं के विस्तार का कार्य भी जारी है। इन क्षेत्रों में 431 स्कूल खोले गए हैं तथा स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए अस्पतालों की व्यवस्था की जा रही है। गांवों में राशन दुकानों की सुविधा उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि लोगों को आवश्यक वस्तुओं के लिए दूर न जाना पड़े।
खेती और पशुपालन से बढ़ेगी ग्रामीण परिवारों की आय
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के समग्र विकास के लिए कृषि, पशुपालन और स्थानीय आजीविका को भी प्राथमिकता दी जा रही है। पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए परिवारों को दो-दो गायें उपलब्ध कराने और डेयरी विकास के माध्यम से उनकी आय बढ़ाने की पहल की जा रही है। उन्होंने बताया कि इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार में बड़ी सिंचाई परियोजनाओं के लिए लगभग 2,000 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने पर करीब 80 हजार एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है। इससे किसानों को खेती में मदद मिलेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।
पीड़ितों को आत्मनिर्भर बनाना सरकार की जिम्मेदारी
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोटों में अनेक निर्दोष ग्रामीणों ने अपने अंग गंवाए और कई परिवारों को लंबे समय तक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि नक्सल हिंसा से प्रभावित लोगों के पुनर्वास और सहायता का अभियान लगातार जारी रहेगा। सरकार का प्रयास है कि कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति सहायता से वंचित न रहे। कार्यक्रम के दौरान लाभार्थियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। सुकमा जिले के दिव्यांग पुलिस जवान मड़काम मुन्ना ने बताया कि वर्ष 2013 में गश्त के दौरान आईईडी विस्फोट में उनका बायां पैर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था। कृत्रिम पैर मिलने के बाद वे फिर से चलने लगे हैं और देशसेवा के लिए तैयार हैं। बीजापुर जिले के धर्मारम निवासी चंद्रैया सपका ने बताया कि वर्ष 2012 में आईईडी विस्फोट में उनका दायां पैर चला गया था। शिविर में कृत्रिम पैर मिलने के बाद अब वे फिर से चल पा रहे हैं। वहीं, दंतेवाड़ा जिले के अजय सोरी और कोसी पोडियाम ने ट्राइसाइकिल मिलने पर खुशी जताई। लाभार्थियों ने इस पहल के लिए केंद्र और राज्य सरकार तथा सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया। अमित शाह और मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नक्सलवाद से प्रभावित लोगों के पुनर्वास, दिव्यांगजनों की सहायता और दूरस्थ क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के प्रयास जारी रहेंगे। सरकार का लक्ष्य है कि बस्तर का प्रत्येक गांव विकास की मुख्यधारा से जुड़े, युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर मिलें और प्रभावित परिवार सम्मान के साथ आत्मनिर्भर जीवन जी सकें।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री ने किया आत्मीय स्वागत

