कोरबा (AkhandBharatHNKP.Com)। भारतीय जनता पार्टी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि समर्पण दिवस के रूप में मनाई। इस अवसर पर जिला भाजपा कार्यालय में श्रद्धासुमन अर्पित कर पंडित दीनदयाल उपाध्याय को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद, घंटाघर स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया।
कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी, सह संभाग प्रभारी रायपुर डॉ. राजीव सिंह, महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत व छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा विपणन एवं विकास संघ के अध्यक्ष भोजराम देवांगन सहित भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। कार्यक्रम के दौरान सभी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के मार्गदर्शन में समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को दोहराया। इस अवसर पर पूर्व महापौर जोगेश लांबा, कोसाबाड़ी मंडल अध्यक्ष डॉ. राजेश राठौर, जिला महामंत्री अजय विश्वकर्मा, जिला कोषाध्यक्ष अजय पांडेय, एमआईसी सदस्य हितानंद अग्रवाल, जिला उपाध्यक्ष योगेश जैन, रेणुका राठिया, लक्की नंदा, जिला मंत्री अजय कंवर, जिला मीडिया प्रभारी अर्जुन गुप्ता, सह मीडिया प्रभारी शैलेन्द्र यादव, महिला मोर्चा अध्यक्ष प्रीति स्वर्णकार, पिछड़ा मोर्चा अध्यक्ष डॉ. विजय राठौर और अन्य कई गणमान्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
पंडित दीनदयाल राष्ट्रवादी विचारधारा के प्रवक्ता थे : गोपाल मोदी
जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे केवल राजनेता नहीं, बल्कि महान चिंतक, दूरदर्शी संगठनकर्ता और राष्ट्रवादी विचारधारा के प्रबल प्रवक्ता थे। उनका जीवन राष्ट्र सेवा, संगठन निर्माण और समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान के लिए समर्पित रहा। उन्होंने आगे कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानववाद आज भी भारत के विकास का मार्गदर्शक सिद्धांत है। उनका मानना था कि विकास केवल आर्थिक नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग के संतुलित और समग्र विकास के माध्यम से ही सच्चा राष्ट्र निर्माण संभव है। उन्होंने अपना जीवन निस्वार्थ भाव से समाज और संगठन को समर्पित किया, जो हम सभी कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
पंडित उपाध्याय त्याग, सादगी व राष्ट्रनिष्ठा के प्रतीक : राजीव सिंह
सह संभाग प्रभारी डॉ. राजीव सिंह ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का विचार था कि समाज हमेशा एकजुट रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि जाति-पाती पूछे नहीं कोई, और हरि को भजे सो हरि के होइ। जात-पात कोई नहीं पूछता जो भगवान का नाम लेता है, भगवान उसी का हो जाते हैं। उन्होंने आगे कहा कि पंडित जी त्याग, सादगी और राष्ट्रनिष्ठा के प्रतीक थे। उन्होंने जीवन को शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आत्मिक संतुलन से देखा, और यह समझा कि चारों के तालमेल से ही व्यक्ति और समाज का स्वस्थ विकास संभव है। इस कार्यक्रम के माध्यम से पंडित दीनदयाल उपाध्याय के समर्पण और राष्ट्रभक्ति के संदेश को जीवंत रखा गया और कार्यकर्ताओं ने उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया।

