छत्तीसगढ़ में शहरी विकास को नई दिशा: गृह निर्माण मंडल का बदला नाम, अधोसंरचना पर बढ़ेगा फोकस

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      रायपुर (AkhandBharatHNKP.Com)। छत्तीसगढ़ में शहरी अधोसंरचना और आवासीय विकास को गति देने के लिए साय सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। विधानसभा में गुरुवार को वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल (संशोधन) विधेयक 2026 ध्वनिमत से पारित हो गया। संशोधन के बाद अब मंडल का नाम बदलकर छत्तीसगढ़ गृह एवं अधोसंरचना विकास मंडल कर दिया गया है।

          छत्तीसगढ़

          सरकार की योजना के तहत रायपुर, नवा रायपुर, भिलाई-दुर्ग और राजनांदगांव को मिलाकर एक एकीकृत शहरी कॉरिडोर विकसित किया जाएगा, जिसमें मंडल की भूमिका अहम होगी। वित्त मंत्री ने कहा कि अब मंडल केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे बहुआयामी इंफ्रास्ट्रक्चर एजेंसी के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे योजनाबद्ध शहरीकरण, बेहतर कनेक्टिविटी और किफायती आवास को बढ़ावा मिलेगा।

          उपलब्धियां और आगे की योजना

          राज्य सरकार ने 735 करोड़ रुपये का ऋण भुगतान कर मंडल को वित्तीय रूप से सशक्त बनाया है। पिछले दो वर्षों में 3,050 करोड़ रुपये की लागत से 78 नई परियोजनाएं शुरू की गई हैं। नवंबर 2025 में आयोजित आवास मेले में 2,060 करोड़ रुपये की 56 परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया। इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के तहत दो हजार ईडब्ल्यूएस आवास स्वीकृत किए गए हैं, जबकि 50 करोड़ रुपये की रिडेवलपमेंट परियोजनाओं की डीपीआर तैयार की गई है।

          अवैध प्लॉटिंग पर लगेगी रोक

          शहरों के सुनियोजित विकास और अवैध प्लॉटिंग पर नियंत्रण के लिए छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश (संशोधन) विधेयक 2026 भी विधानसभा में पारित किया गया। वित्त मंत्री ने कहा कि इसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में अनियंत्रित विस्तार को रोकना है। अन्य राज्यों की तर्ज पर रिंग रोड जैसी परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। रायपुर मास्टर प्लान के तहत एमआर-43 मार्ग इसका उदाहरण है।

          हाउसिंग बोर्ड को मिली नई जिम्मेदारी

          अब तक नगर विकास योजनाएं मुख्य रूप से रायपुर विकास प्राधिकरण और नवा रायपुर प्राधिकरण तक सीमित थीं, लेकिन संशोधन के बाद छत्तीसगढ़ गृह एवं अधोसंरचना विकास मंडल और छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम को भी योजनाएं तैयार करने और लागू करने का अधिकार मिलेगा। नई व्यवस्था के तहत हाउसिंग बोर्ड अब मांग के आधार पर ही निर्माण कार्य करेगा। 60 प्रतिशत बुकिंग होने के बाद ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिससे खाली पड़े मकानों और दुकानों की समस्या खत्म होगी। साथ ही राज्य के 23 जिलों में नए प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी भी की जा रही है।

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