कोर्ट की टिप्पणी— लालू परिवार ने आपराधिक गिरोह की तरह काम किया
पटना (एजेंसी)। लैंड फॉर जॉब केस मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेज प्रताप यादव, तेजस्वी यादव तथा बेटियां मीसा भारती और हेमा यादव सहित कुल 41 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। अब इन सभी के विरुद्ध नियमित रूप से मुकदमा चलेगा।
कोर्ट ने इस मामले में 52 आरोपियों को बरी करने का आदेश भी दिया है। आरोप तय किए जाने की सुनवाई के दौरान शुक्रवार को लालू यादव की बड़ी बेटी मीसा भारती तथा बेटे तेज प्रताप और तेजस्वी यादव राउज एवेन्यू कोर्ट में उपस्थित रहे। यह मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज किया गया है। राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विशाल गोग्ने ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार ने एक आपराधिक गिरोह की तरह कार्य किया और सरकारी नौकरी को सौदेबाजी के साधन के रूप में इस्तेमाल कर अपने परिवार के नाम अचल संपत्तियां हासिल करने की व्यापक साजिश रची।
सरकारी नौकरियों का किया दुरूपयोग
अदालत ने कहा कि संदेह के आधार पर यह निष्कर्ष निकलता है कि लालू प्रसाद यादव ने अपनी पत्नी, बेटों और बेटियों के लिए संपत्ति अर्जित करने के उद्देश्य से सरकारी नौकरियों का दुरुपयोग किया। इस प्रकरण में आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) एवं 13(1)(डी) के तहत आरोप तय किए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी को निर्धारित की गई है।
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