नक्सलियो को कांगेस सरकार का संरक्षण मिला इसलिए अभियान में हुई देरी: अमित शाह, भूपेश ने किया खंडन बोले सबूत दे

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      रायपुर (AkhandBharatHNKP.Com)। लोकसभा में नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया कि देश अब लगभग नक्सल-मुक्त हो चुका है और 31 मार्च 2026 तक तय लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। अपने संबोधन में उन्होंने छत्तीसगढ़ की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर नक्सलियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया।

          गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में 706 नक्सली मारे गए हैं, जबकि 4,800 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर पुनर्वास योजना का लाभ लिया है। उन्होंने दावा किया कि अब देश में केवल दो जिले ही नक्सल प्रभावित रह गए हैं और अधिकांश क्षेत्रों से नक्सलवाद का प्रभाव समाप्त हो चुका है। सदन में बोलते हुए अमित शाह ने 20 अगस्त 2019, 24 अगस्त 2024 और 31 मार्च 2026 की तीन महत्वपूर्ण तिथियों का उल्लेख करते हुए कहा कि नक्सल विरोधी रणनीति इन्हीं चरणों में तैयार और लागू की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ में पूर्व कांग्रेस सरकार के कारण इस अभियान में देरी हुई। इस दौरान उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का नाम लेते हुए कहा कि यदि वे चाहें तो आरोपों के प्रमाण भी प्रस्तुत किए जा सकते हैं। गृह मंत्री ने नक्सलियों की तुलना स्वतंत्रता सेनानियों भगत सिंह और बिरसा मुंडा से किए जाने को अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि ये क्रांतिकारी अंग्रेजों के खिलाफ लड़े थे, जबकि नक्सली लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ हिंसक गतिविधियों में संलिप्त हैं।

          केन्द्रीय मंत्री का बयान सरासर झूठा

          लोकसभा

          पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गृह मंत्री के आरोपों को खारिज करते हुए बयान को सरासर झूठ बताया। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों, मुख्य सचिवों और पुलिस अधिकारियों की कई बैठकें हुईं, लेकिन कभी केंद्र सरकार ने इस तरह का आरोप नहीं लगाया। बघेल ने कहा कि यदि केंद्र के पास कोई प्रमाण था तो उसे पहले सार्वजनिक किया जाना चाहिए था। उन्होंने जोर देकर कहा कि नक्सल मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए और उनकी सरकार ने भी लगातार कार्रवाई करते हुए बस्तर सहित सुदूर इलाकों में सुरक्षा कैंप स्थापित किए, जिससे वर्तमान अभियानों को मजबूती मिली है। साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने नक्सली हिंसा में अपने वरिष्ठ नेताओं को खोया है, इसलिए इस संवेदनशील विषय पर आरोप-प्रत्यारोप से बचना चाहिए।

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