कोरबा (AkhandBharatHNKP.Com)। भारत एलयूमिनियम कंपनी बालको में अवैध मनमानी व अवैध गतिविधियों पर चिंता व्यक्त करते हुए पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में कहा कि बालको में भारत सरकार की अभी भी 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है। वहां जो कुछ चल रहा है वह केवल श्रमिकों का शोषण ही नहीं बल्कि एक गंभीर अपराध, न्यायालयीन आदशों का अपमान, औद्योगिक कानूनों का खुला उल्लंघन व श्रमिक मानवाधिकारों पर प्रहार है।
पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने अपने पत्र में बताया कि मूल स्थायी आदेश जो श्रम विभाग और यूनियन की संयुक्त स्वीकृति से लागू हुए थे। 6 माह बिना अवकाश सेवा करने वाला प्रत्येक श्रमिक स्वत: स्थायी श्रेणी में आता है, लेकिन बालको प्रबंधन ने अवैध संशोधन अनेक प्रावधानों में कटौती कर श्रमिकों के स्थायीकरण अधिकार को पूरी तरह समाप्त कर दिया। श्रमिकों द्वारा प्रस्तुत मूल स्थायी आदेश के सत्यापन की मांग होने पर बालको प्रबंधन ने फर्जी स्थायी आदेश काटछाँट किए गए दस्तावेज तथा न्यायालय को भ्रमित करने वाले कागजात सेशन कोर्ट में प्रस्तुत किए। न्यायालय ने इसे गंभीर अपराध मानते हुए बालको प्रबंधन के विरुद्ध आईपीसी की धारा 420ए 467ए 468ए 471 के तहत कार्रवाई का आदेश दिया।
बालको का कंपनी सचिव फरार
श्रम विभाग सेशन कोर्ट और उच्च न्यायालय तीनों के आदेशों और टिप्पणियों को नजरअंदाज कर बालको लगातार अवैध प्रशासनिक व्यवस्था चलाता रहा है। यह न केवल न्यायालय की अवमानना है, बल्कि भारत की औद्योगिक प्रशासनिक संरचना को खुली चुनौती है। गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद भी बालको का कंपनी सचिव कानूनी प्रक्रिया से बचने हेतु फरार है जो स्वयं में एक दंडनीय कृत्य है। पूर्व मंत्री ने आगे कहा कि बालको द्वारा 6 माह की सेवा पूर्ण करने वाले श्रमिकों का स्थायीकरण रोकना उन्हें असुरक्षा और अनिश्चितता में धकेलना, न्यायालय आदेशों का पालन न करना ये सब अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा श्रमिकों के हित रक्षा हेतु बनाए गए कनूनों मानवाधिकार अधिनियम तथा संविधान के अनुच्छेद 21 का गंभीर उल्लंघन है।
केंद्र सरकार करे निष्पक्ष कार्रवाई – जयसिंह
पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि बालको में श्रमिक शोषण केवल एक कंपनी का मामला नहीं है बल्कि भारत की न्यायिक प्रतिष्ठा, औद्योगिक कानून, श्रमिक अधिकार और मानवाधिकारों की सुरक्षा का राष्ट्रीय प्रश्न है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि इस मामले में कठोर त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई कर देश के श्रमिकों के अधिकारों में भरोसा पुनर्स्थापित किया जाए।
बालको प्रबंधन की अमानवीय कार्रवाई से सेवानिवृत्त कर्मचारी त्रस्त


