सद्‌गुरू की शरण में चले जाओ और जैसा वे बताएं, वैसे ही उनकी आज्ञा का पालन करो….

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          सद्‌गुरू

          सद्‌गुरू बिना जग सूना –

                     अगर आपको आपके प्रबल पुण्योदय से कोई सद्‌गुरू मिलते हैं और वो कहते हैं कि मैं तुझे अनन्त सुख की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करवाता हूँ, तो आप हिचको मत, तत्काल उन सद्‌गुरू की शरण में चले जाओ और जैसा वे बताएं, वैसे ही उनकी आज्ञा का पालन करो….

          फिर अपना सब कुछ, अपना सर्वस्व सद्‌गुरू के चरणों में समर्पित कर दो, उनके आश्रय में अपना समस्त जीवन होम दो…..

          सद्‌गुरू

          अपने समस्त गृहण किये हुए इस सांसारिक ज्ञान को मिथ्या जानकर सद्‌गुरू के द्वारा कहे गये प्रत्येक शब्द के भाव को ह्रदयंगम करो क्योंकि सद्‌गुरू के प्रत्येक शब्द में अनन्त सत-शास्त्रों का सार समाया हुआ रहता है. …….. यह तो अद्भुत प्रेरणादायी बात है !

          शास्त्रों में आता है कि सच्चे देव, सच्चे शास्त्र तो आप को अनन्त बार मिले। साक्षात तीर्थंकर सरीखे सच्चे गुरू भी मिले, परन्तु उनके प्रति आप की सच्ची भक्ति नहीं होने से आप को अपने परमात्मा की आजतक प्राप्ति नहीं हुई है।

          सद्‌गुरू बिना सम्पूर्ण जगत ही सूना है. अतः एक बार, सिर्फ एक बार सद्‌गुरू को अपना सर्वस्व समर्पित कर दो, फिर वे शीघ्र ही आपके अनन्त दुखों से आपको मुक्ति दिलवाकर आपके विज्ञानघन, चैतन्य-चमत्कार परमात्मा की प्राप्ति आपको कराकर, अनन्त सुख की सत्ता आपके हाथ में रख देंगे।

           

          सद्‌गुरू

          गुरुदेव मिलेंगे तो भक्ति से..

          यद्यपि वेदों, शास्त्रों, पुराणों, एवं अन्यान्य धर्म ग्रंथों में अनेक प्रकार के मार्ग बताये गये हैं – कर्म, ज्ञान, योग, आदि किन्तु माया-निवृत्ति एवं भगवत-प्राप्ति ये दोनों साध्य भक्ति से ही प्राप्त होंगे और कोई अन्य मार्ग नहीं | उसका एक कारण ये है कि माया शक्ति गुरुदेव की शक्ति है, है तो जड़, लेकिन गुरु की शक्ति पाकर ये गुरुदेव के बराबर हो जाती है | जैसे आपको कोई लठिया मारे तो उसमे जितनी ताक़त है उतनी जोर की लठिया मारेगा वो | लठिया जड़ है लेकिन उसका हाथ चेतन है तो जितनी ताक़त हाथ में होगी उतनी जोर से लठिया मारेगी | अगर हाथ अपनी शक्ति न दे तो लठिया बेकार है, पड़ी है ऐसे ही ये माया शक्ति है ये भगवान् की शक्ति पाकर भगवान् के बराबर हो जाती है इसलिए और कौन शक्तिमान ऐसा है जो भगवान् की माया का सामना कर सके

          जो मेरी भक्ति करते हैं, पूर्ण शरणागत हो जाते हैं उनपर मैं कृपा करता हूँ, तब उनकी माया छूट जाती है | बिना मेरी कृपा के माया छूट नहीं सकती |तो गुरुदेव की शक्ति होने के कारण, गुरुदेव के द्वारा ही हटाई जा सकती है | बस सीधी सी बात है | तो कर्म से गुरुदेव तो मिलेंगे नहीं, योग से गुरुदेव तो सामने आयेंगे नहीं, ज्ञान से गुरुदेव सामने आयेंगे नहीं, तो कृपा कैसे करेंगे ………मिलेंगे तो केवल और केवल भक्ति से….

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