Friday, February 6, 2026

मेडिकल पीजी प्रवेश पर हाईकोर्ट का फैसला, संस्थागत और ओपन कैटेगरी के लिए 50-50 प्रतिशत सीटें निर्धारित

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बिलासपुर (AkhandBharatHNKP.Com)। छत्तीसगढ़ में मेडिकल पीजी (स्नातकोत्तर) प्रवेश को लेकर हाईकोर्ट ने बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस बी.डी. गुरु की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया है कि मेडिकल पीजी पाठ्यक्रमों में 50 प्रतिशत सीटें संस्थागत आरक्षण और 50 प्रतिशत सीटें ओपन कैटेगरी के लिए आरक्षित रहेंगी।

हाईकोर्टहाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि संस्थागत आरक्षण के अंतर्गत शासकीय एवं निजी चिकित्सा महाविद्यालयों की कुल 50 प्रतिशत सीटें उन अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित होंगी, जिन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य में स्थित एनएमसी से मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस किया है, अथवा जो सेवारत अभ्यर्थी हैं। इन सीटों पर प्रवेश केवल संस्थागत आरक्षण के पात्र अभ्यर्थियों के बीच मेरिट के आधार पर दिया जाएगा। वहीं शेष 50 प्रतिशत सीटें ओपन कैटेगरी मानी जाएंगी। इन सीटों पर राज्य स्तरीय मेरिट सूची के आधार पर सभी पात्र अभ्यर्थियों को प्रवेश दिया जाएगा और इन पर किसी भी प्रकार का संस्थागत आरक्षण लागू नहीं होगा। हाईकोर्ट ने यह भी व्यवस्था दी है कि यदि संस्थागत आरक्षण के अंतर्गत निर्धारित सीटों पर पर्याप्त पात्र अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं होते हैं, तो मॉप-अप राउंड में ऐसी खाली सीटों को ओपन कैटेगरी में परिवर्तित कर दिया जाएगा, ताकि कोई भी सीट रिक्त न रहे। यह मामला डॉ. समृद्धि दुबे द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। उन्होंने बताया था कि वे छत्तीसगढ़ की मूल निवासी हैं, लेकिन उन्होंने एमबीबीएस की पढ़ाई राज्य से बाहर से की है। याचिका में मेडिकल पीजी प्रवेश नियमों में डोमिसाइल और संस्थागत वरीयता के नाम पर हो रहे भेदभाव को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता ने इसे संविधान के समानता के अधिकार के खिलाफ बताया था।

आदेश को स्पष्ट किया जाना चाहिए

राज्य सरकार ने 20 नवंबर 2025 को दिए गए हाईकोर्ट आदेश के पैरा-21 को लेकर स्पष्टीकरण की मांग की थी। सरकार का कहना था कि संस्थागत वरीयता को लेकर आदेश को और स्पष्ट किया जाना चाहिए। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव श्रीवास्तव ने दलील दी कि किसी स्पष्टीकरण की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के तनवी बहल प्रकरण पर आधारित है, जिसमें डोमिसाइल आधारित आरक्षण को असंवैधानिक करार दिया गया है।

छत्तीसगढ़ : मेडिकल पीजी में राज्य कोटे की सीटें अब 50% से घटकर 25 प्रतिशत हुई

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