
कोरबा (AkhandBharatHNKP.Com)। कुसमुंडा खदान विस्तार परियोजना के अंतर्गत भूमि अधिग्रहण से प्रभावित ग्राम जटराज के लगभग 10 भूविस्थापित परिवार पिछले आठ माह से गंभीर उपेक्षा और अमानवीय परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। बता दें कि आठ माह पूर्व एसईसीएल प्रबंधन द्वारा इन परिवारों के मकान तोड़ दिए गए थे, परंतु आज तक न उन्हें पुनर्वास मिला और न ही वैकल्पिक आवास या किराया भुगतान-जैसा कि प्रबंधन ने स्वयं वादा किया था।
इस मामले को पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने गंभीर बताते हुए कहा कि एसईसीएल ने प्रभावित परिवारों को यह स्पष्ट आश्वासन दिया था कि वैकल्पिक पुनर्वास स्थल तैयार होने तक भूविस्थापित किराए के मकानों में रह सकते हैं जिसका किराया एसईसीएल देगी। पूर्व मंत्री अग्रवाल ने बताया कि एसईसीएल मुख्यालय में पदस्थ महाप्रबंधक (भू-राजस्व) द्वारा प्रबंधन एवं प्रशासन को लगातार भ्रामक जानकारी दी जा रही है, जिसकी वजह से प्रभावित ग्रामीणों की समस्याएँ और भी गम्भीर होती जा रही हैं। इस संबंध में पूर्व में भी कई पत्र एसईसीएल प्रबंधन को भेजे गए, किन्तु अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई। पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने चेतावनी दी है कि यदि एसईसीएल प्रबंधन तत्काल समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाता, तो प्रभावित ग्रामीणों को उच्च प्रशासनिक एवं न्यायिक मंचों पर संघर्ष करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
वास्तविकता यह है कि आज तक एक भी माह का किराया भुगतान नहीं किया गया और न ही नई बसाहट का कोई कार्य आरंभ किया गया। पीडि़त परिवारों को चिन्हित बसाहट स्थल में बसने से रोकना और फिर कहीं भी वैकल्पिक व्यवस्था न करना एसईसीएल की संवेदनहीनता और प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। विस्थापित परिवार अपने घरों से वंचित होकर मूलभूत सुविधाओं, सुरक्षा तथा सम्मानजनक जीवन की तलाश में दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
प्रमुख मांगे
- ग्राम जटराज के विस्थापित परिवारों को तत्काल पूर्व निर्धारित पुनर्वास स्थल पर बसाया जाए।
- प्रबंधन द्वारा किए गए वादे के अनुसार पूरे आठ माह का बकाया किराया तुरंत भुगतान किया जाए।
- जिन परिवारों के मकान तोड़े गए हैं, उन्हें वैकल्पिक भूमि, आवास एवं आवश्यक सुविधाएँ तत्काल उपलब्ध कराई जाएँ।
- पूरे प्रकरण में संलिप्त अधिकारियों की जांच कर कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।
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