Saturday, February 7, 2026

मोदी को गांधी सरनेम से दिक्कत है, इसलिए मनरेगा का नाम बदला,कांग्रेस सड़कों पर उतरकर 5 जनवरी से अभियान चलाएगी

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नई दिल्ली(एजेंसी)। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलने के विरोध में कांग्रेस पार्टी सड़कों पर उतरकर 5 जनवरी से देशभर में अभियान चलाएगी। शनिवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में यह फैसला लिया गया है। कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने उक्त जानकारी दी। मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि मोदी को गांधी सरनेम से दिक्कत है, इसलिए मनरेगा का नाम बदला गया।

मनरेगा

खड़गे ने कहा कि मनरेगा से राष्ट्रपिता गांधी का नाम हटाना। उनका अपमान है। क्योंकि सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह ने मनरेगा को कानून बनाया था। हमने हक दिया। आप नाम बदल रहे हैं। आप केवल गांधी परिवार ही नहीं। इनको महात्मा गांधी का भी नाम नहीं पसंद हैं। गांधी सरनेम से सरकार को दिक्कत है।

बता दे कि केंद्र कि भाजपा सरकार ने मनरेगा का नाम बदलकर विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक (VB G RAM G) कर दिया है।  इसका विरोध कांग्रेस पार्टी सड़कों पर उतरकर करेगी। 5 जनवरी से देशभर में अभियान चलाया जाएगा।

राहुल गांधी ने कहा- फैसला सीधे पीएम हाउस से

राहुल गाँधी ने कहा कि ये फैसला सीधे पीएम हाउस से लिया गया है। मनरेगा सिर्फ योजना नहीं थी। मनरेगा राइट बेस्ड कॉन्सेप्ट था। यानी इससे देश के करोड़ों लोगों को मिनिमम वेज (न्यूनतम आय) मिलती थी। मनरेगा बंद करना डायरेक्ट राइट बेस्ड के कॉन्सेप्ट पर आक्रमण है। ये जो पैसा लिया जा रहा है, वो राज्यों से छीनकर केंद्र सरकार ले रहा है। ये पावर और फाइनेंस का कान्ट्रैक्शन है। इसके लिए किसी भी राज्यों से सहमती नहीं ली गई है। ये फैसला सीधे पीएम हाउस से लिया गया है।

राष्ट्रपति ने भी नए कानून पर मंजूरी दी

कांग्रेस ने  नए कानून पर आपत्ति जताई है। कांग्रेस ने इसे महात्मा गांधी का अपमान बताया है । यूपीए कि सरकार के समय महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह लेने वाला विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक शीतकालीन सत्र में पारित किया गया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी इसे अपनी मंजूरी दे दी है। केंद्रीय योजना के बजाय नया कानून यह प्रावधान करता है कि केंद्र और राज्यों को योजना की फंडिंग 60:40 प्रतिशत के अनुपात में साझा करनी होगी। नया कानून हर ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के वेतन रोजगार की गारंटी देता है।

मनरेगा को विस्तार से समझिये

मनरेगा

राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 (या, एनआरईजीए 42, बाद में इसे “महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम ‘एमजीएनआरईजीए’ के नाम से बदल दिया गया) एक भारतीय श्रम कानून और सामाजिक सुरक्षा उपाय है जिसका उद्देश्य’ कार्य करने का अधिकार ‘है। इसका लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार की सुरक्षा को बढ़ाने के लिए एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों की रोज़गार प्रदान करने के लिए हर परिवार के लिए है, जिनके वयस्क सदस्य अकुशल मैनुअल काम करते हैं।

राहुल- प्रियंका का केन्द्र सरकार पर हमला, बोले- 20 साल का मनरेगा एक दिन में ध्वस्त

अधिनियम पहली 1991 में प्रस्तावित किया गया था। 2006 में, इसे संसद में अंत में स्वीकार किया गया और भारत के 625 जिलों में कार्यान्वित किया गया। इस पायलट अनुभव के आधार पर, एनआरईजीए को 1 अप्रैल, 2008 से भारत के सभी जिलों में शामिल करने के लिए तैयार किया गया था। इस क़ानून को सरकार द्वारा “दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे महत्वाकांक्षी सामाजिक सुरक्षा और सार्वजनिक कार्य कार्यक्रम” कहा जाता है। विकास रिपोर्ट 2014, विश्व बैंक ने इसे “ग्रामीण विकास का तारकीय उदाहरण” कहा।

मनरेगा को “एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों की गारंटीकृत मजदूरी रोजगार प्रदान करके ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका सुरक्षा को बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, जिसके लिए प्रत्येक परिवार के वयस्क सदस्यों को अकुशल मैनुअल काम करने के लिए स्वयंसेवा किया गया था।”

मनरेगा का एक और उद्देश्य

मनरेगा का एक और उद्देश्य है टिकाऊ संपत्तियां (जैसे सड़कों, नहरों, तालाबों, कुओं) का निर्माण करें आवेदक के निवास के 5 किमी के भीतर रोजगार उपलब्ध कराया जाना है, और न्यूनतम मजदूरी का भुगतान करना है। यदि आवेदन करने के 15 दिनों के भीतर काम नहीं किया गया है, तो आवेदक बेरोजगारी भत्ता के हकदार हैं। इस प्रकार, मनरेगा के तहत रोजगार एक कानूनी हकदार है। मनरेगा को मुख्य रूप से ग्राम पंचायत  द्वारा लागू किया जाना है। ठेकेदारों की भागीदारी प्रतिबंधित है। जल संचयन, सूखा राहत और बाढ़ नियंत्रण के लिए आधारभूत संरचना बनाने जैसे श्रम-गहन कार्यों को प्राथमिकता दी जाती है।

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