Friday, February 6, 2026

बालको से उत्पन्न प्रदूषण मानक दर से कई गुना अधिक : जयसिंह अग्रवाल

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  • पूर्व कैबिनेट मंत्री ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र, बालको पर लगाए गंभीर आरोप

कोरबा (AkhandBharatHNKP.Com)। भारत एल्यूमिनियम कंपनी बालको के एल्यूमिनियम उत्पादन के दौरान वायु प्रदूषण के उल्लंघन का मामला सामने आया है। मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला रिपोर्टों के अनुसार संयंत्र से निकलने वाला प्रदूषण अनुमेय मानकों से कई गुना अधिक है जिससे कोरबा अंचल में रहने वाले नागरिकों पर दीर्घकालिक व पीढ़ीगत खतरा उत्पन्न हो गया है। उक्त मामले को लेकर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है।

बालको

Balco – PM and HF issue

Lab Reports Vimta Labs Hyderabad

पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने बताया कि विमटा लैब्स द्वारा बालको की पॉटलाइन-1 और पॉटलाइन- 2 से लिए गए नमूनों की रिपोर्ट स्थिति की गंभीरता को उजागर करती हैं। रिपोर्ट के अनुसार पार्टिकुलेट मैटर का स्तर 50 mg/Nm³ की अनुमेय सीमा के मुकाबले 1400 से 1700 mg/Nm³  तक पाया गया। यानी मानक से 27 से 33 गुना अधिक। इसी प्रकार पार्टिकुलेट फ्लोराइड की अनुमेय सीमा 0.65 mg/Nm³ के विरुद्ध 8 से 13 mg/Nm³  दर्ज की गई, जो 11 से 19 गुना अधिक है। सबसे अधिक चिंता का विषय गैसीय फ्लोराइड (हाइड्रोजन फ्लोराइड) है। इसकी अनुमेय सीमा 25 mg/Nm³ निर्धारित है, जबकि पॉटलाइन-1 में इसका स्तर 96-119 mg/Nm³ और पॉटलाइन-2 में 137-187 mg/Nm³ तक पाया गया। विशेषज्ञों के अनुसार HF गैस वातावरण में निकलने के बाद वायुमंडलीय नमी से अभिक्रिया कर फ्लोराइड आयनों में बदल जाती है जो मिट्टी, जलस्रोतों, फसलों, पशुधन और मानव अस्थि-तंत्र में जमा होकर दशकों से लेकर सैकड़ों वर्षों तक बनी रह सकती है। नागरिकों और चिकित्सकीय विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार का फ्लोराइड प्रदूषण दंत व अस्थि फ्लोरोसिस, आँख-नाक-गला-फेफड़ों में जलन, श्वसन रोग, पशुधन की मृत्यु, दूध उत्पादन में गिरावट तथा फसलों के झुलसने जैसी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न करता है। मिट्टी और भूजल में जमा फ्लोराइड भविष्य की पीढिय़ों के लिए भी गंभीर संकट का संकेत है। उन्होंने आगे कहा है कि चिंता की बात यह है कि जब मौजूदा संयंत्र ही प्रदूषण नियंत्रण मानकों का पालन नहीं कर रहा, तब भी बालको की विस्तार परियोजना को पर्यावरणीय स्वीकृति प्रदान की गई है। वर्तमान में कंपनी की उत्पादन क्षमता लगभग 5.70 लाख टन प्रति वर्ष है, जबकि विस्तार परियोजना के तहत इसे 3.70 लाख टन प्रति वर्ष और बढ़ाया जाना प्रस्तावित है। तीनों पॉट लाइनों के पूर्ण संचालन की स्थिति में कोरबा क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर कितना भयावह होगा, इसका अंदाजा लगाना कठिन नहीं है।

बालको में केन्द्र सरकार की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी

उन्होंने आगे बताया कि हाल ही में एल्यूमिनियम फ्लोराइड की खपत सीमा 20 किग्रा/टन निर्धारित किए जाने की अधिसूचना जारी की गई है। विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है कि यह सीमा खपत से संबंधित है, उत्सर्जन से नहीं। उत्सर्जन मानक आज भी स्वतंत्र, बाध्यकारी और अपरिवर्तित हैं। ऐसे में इस अधिसूचना की आड़ में अत्यधिक उत्सर्जन को वैध ठहराने का कोई कानूनी आधार नहीं है। पूर्व मंत्री ने कहा कि यह मामला इसलिए भी गंभीर हो जाता है क्योंकि भारत सरकार आज भी बालको में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती है।

प्रदूषणकारी पॉटलाइनों को तत्काल रोकने की मांग

कोरबा के नागरिकों और सामाजिक संगठनों की मांग है कि बालको के प्रदूषणकारी पॉटलाइनों का तत्काल संचालन रोका जाए। किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से तकनीकी और स्वास्थ्य-आधारित जांच कराई जाए तथा दोषी कंपनी प्रबंधन और अधिकारियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही प्रभावित नागरिकों, किसानों और पशुपालकों को उचित मुआवजा देने और विस्तार परियोजना की स्वीकृति पर रोक लगाने की मांग भी उठ रही है। यह मामला केवल एक औद्योगिक इकाई का नहीं, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के स्वच्छ पर्यावरण में जीवन के मौलिक अधिकार से जुड़ा है। यदि समय रहते निर्णायक कदम नहीं उठाए गए, तो इसके दुष्परिणाम कोरबा और आसपास के क्षेत्रों को लंबे समय तक झेलने पड़ सकते हैं।

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