चंडीगढ़ (एजेंसी) (AkhandBharatHNKP.Com)। पंजाब के लोगों की आंखों में दर्द साफ दिखाई देता है। यहां हर तरफ बर्बादी नजर आती है। सैकड़ों एकड़ फसल बाढ़ में डूब चुकी है और गलियों में भी तीन से चार फीट पानी भरा है। कई घरों के भीतर भी दो-दो फीट पानी है। लोगों का कहना है कि उन्हें पहली बार ऐसी बाढ़ का सामना करना पड़ रहा है। बाढ़ ने फसल बचने की रही सही उम्मीद भी मिट्टी में मिला दी है। इसी बीच पीएम मोदी बाढ़ प्रभावित राज्यों का दौरा करने वाले हैं। पीएम मोदी 9 सितंबर को पंजाब के गुरदासपुर जाएंगे। पंजाब भाजपा की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर इसकी जानकारी दी है।
इसके अलावा पंजाब बीजेपी के एक्स अकाउंट पर पीएम मोदी के दौरे से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी भी दी गई। इस पोस्ट में आगे लिखा गया, वे (प्रधानमंत्री मोदी) बाढ़ प्रभावित भाई-बहनों और किसानों से सीधे मुलाकात कर उनका दुख साझा करेंगे और पीडि़तों की मदद के लिए हर संभव कदम उठाएंगे। प्रधानमंत्री का यह दौरा साबित करता है कि केंद्र की भाजपा सरकार हमेशा पंजाब के लोगों के साथ खड़ी है और इस कठिन समय में पूरा सहयोग प्रदान करेगी। पंजाब के अलावा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्य सबसे अधिक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। सूत्रों ने बताया कि पीएम मोदी इनमें से कुछ क्षेत्रों का दौरा करेंगे और हालात का जायजा लेंगे। उनका दौरा ऐसे वक्त हो रहा है जब कुछ राज्य सरकारों ने संकट से निपटने के लिए केंद्र से वित्तीय सहायता की मांग की है।
शिवराज चौहान ने किया पंजाब का दौरा
इससे पहले केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पंजाब के अमृतसर जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। अमृतसर में उन्होंने कहा कि बाढ़ से उत्पन्न स्थिति का आकलन करने के लिए दो केंद्रीय दल भी पंजाब का दौरा कर रहे हैं और वे केंद्र को एक रिपोर्ट सौंपेंगे। अमृतसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए चौहान ने कहा कि देश और मानवता की सेवा में पंजाबी हमेशा सबसे आगे रहे हैं।
1500 गांव बाढ़ की चपेट में, 3.87 लाख प्रभावित
आपदा की चपेट में आए पंजाब में नदियों के उफान से तबाही का मंजर है। इतिहास की सबसे बड़ी बाढ़ त्रासदी ने सबको झकझोर कर रख दिया है। अब तक 46 लोगों की जानें जा चुकी हैं। 1.74 लाख हेक्टेयर फसल बर्बाद हो चुकी है। सभी 23 जिलों के करीब 1500 गांव और 3.87 लाख से अधिक आबादी बाढ़ की चपेट में है। लोगों के आशियाने, सामान और पशुधन बाढ़ में बह चुके हैं। दरअसल, रावी, व्यास व सतलुज नदी पंजाब की लाइफलाइन मानी जाती हैं। इनकी सहायक नदियों व रजवाहों के जरिये हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली तक जलापूर्ति होती है। यहीं से कुछ पानी पाकिस्तान में भी प्रवेश करता है। पहाड़ों से आने वाले पानी के प्रबंधन के लिए रूपनगर व बिलासपुर सीमा पर सतलुज नदी पर भाखड़ा डैम, पठानकोट में रावी नदी पर रणजीत सागर डैम और शाहपुर कंडी डैम व कांगड़ा में ब्यास नदी पर पौंग डैम बने हुए हैं। हिमाचल व पंजाब में सामान्य से अधिक बारिश के चलते बांधों के गेट कई बार खोलने पड़े। इसका सीधा नुकसान पंजाब ने झेला। 1988 में पंजाब में सबसे भीषण बाढ़ आई थी। तब 11.20 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हुआ था। इस साल 30 अगस्त तक ही 14.11 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो चुका था। नदियों का जलस्तर बढऩे से तटबंध कमजोर होकर टूट रहे हैं। बाढ़ का पानी गांवों में घुस रहा है।
पंजाब : बारिश का कहर, घरों में छह फुट तक पानी

