रायपुर (AkhandBharatHNKP.Com)। छत्तीसगढ़ में नई कलेक्टर गाइडलाइन लागू कर दी गई है। बता दें कि इसे 1 अप्रैल को लागू किया जाना था, लेकिन इसमें बदलाव करने की वजह से अब इसे 20 नवंबर से लागू किया जा रहा है। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई और अंबिकापुर समेत कई जिलों में जमीन की कीमत 10 प्रतिशत से 100 प्रतिशत तक बढ़ गई है।
पंजीयन विभाग का कहना है कि छत्तीसगढ़ में आखिरी बार 2017-18 में कीमत बढ़ाई गई थी। 2018-19 से कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है। लंबे समय से जमीन की सरकारी कीमत नहीं बढऩे की वजह से बाजार भाव और सरकारी कीमत में बड़ा अंतर हो गया था। इसके अलावा सड़क पर और सड़क से 20 मीटर अंदर की जमीन के भाव भी बेहद असंतुलित हो गए थे। कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल में जमीन की सरकारी कीमत 30 प्रतिशत तक कम कर दी थी। इसके बाद पांच साल तक जमीन की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया था। भाजपा की नई सरकार ने सबसे पहले 30 प्रतिशत की छूट खत्म की। करीब डेढ़ साल बाद जमीन की कीमत भी बढ़ा दी गई है। बता दें कि इसका असर सीधे आम लोगों पर होगा। लोगों के लिए प्लॉट, फ्लैट, मकान और दुकान खरीदना महंगा हो जाएगा। जमीन की कीमत बढऩे की वजह से सरकारी और प्राइवेट बिल्डरों के मकान भी महंगे हो जाएंगे। इससे लोगों का बैंक लोन भी बढ़ेगा।
सभी जगहों पर कीमत एक समान होगी
राज्य में ऐसा पहली बार हुआ है, जब जमीन की सरकारी कीमत तय करने के लिए वार्डों के अंदर से जाने वाली बायपास सड़कों को भी मुख्य सड़क माना गया है। अफसरों का कहना है कि अभी तक सड़क के एक ओर कीमत ज्यादा रहती थी और दूसरी ओर कम। लेकिन अभी नई गाइडलाइन ऐसे तय की गई है कि सभी जगहों पर कीमत एक समान होगी। मुख्य सड़क पर स्थित संपत्तियों की कीमत सबसे ज्यादा होती है। इसलिए पंजीयन विभाग ने इस पर सख्ती की है। इसमें मुख्य बात यह है कि नई गाइडलाइन निगम चुनाव के लिए अभी वार्डों का जो परिसीमन हुआ है, उसी के आधार पर ही किया गया है। यानी जो एरिया जिस वार्ड में शामिल किए गए हैं नई गाइडलाइन में भी कीमत उसी के अनुसार ही ही बढ़ाई गई है। अब किसी भी वार्ड में जमीन की कीमत एक समान नहीं रहेगी।
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