मुंबई (एजेंसी) (AkhandBharatHNKP.Com)। बहुप्रतीक्षित फिल्म जॉली एलएलबी 3 का ट्रेलर रिलीज हो गया है और इसमें जितनी हास्य की झलक है, उतनी ही भावनात्मक गहराई भी दिखाई दे रही है। अक्षय कुमार और अरशद वारसी एक बार फिर अपने-अपने जॉली अवतार में लौट आए हैं और ट्रेलर देखकर साफ है कि इस बार कहानी सिर्फ कोर्टरूम ड्रामा नहीं, बल्कि किसानों की पीड़ा और सामाजिक न्याय की लड़ाई को भी छूती है। ट्रेलर देखकर जाहिर हो रहा है कि फिल्म की कहानी मजेदार और मसाले से भरी होने वाली है, जो न सिर्फ हंसाएंगी बल्कि समाजिक मुद्दे को भी पुरजोर तरीके से उठाएगी।
करीब 3 मिनट 5 सेकंड लंबे इस ट्रेलर की शुरुआत होती है किसानों की जमीन हड़पने की कहानी से, जहां एक लालची व्यापारी, जिसका किरदार गजराज राव निभा रहे हैं। बिलखते किसानों की जिंदगी तबाह कर देता है। वहीं, अरशद वारसी का जॉली इन किसानों की तरफ से कोर्ट में आवाज उठाता है, जबकि अक्षय कुमार एक बार फिर तेज-तर्रार लेकिन नैतिक रूप से उलझे वकील के रोल में हैं, जो गजराज राव के पक्ष में केस लड़ते हैं। इस संघर्ष में न्याय की परिभाषा, सिस्टम की खामियां और ह्यूमर का दिलचस्प मेल देखने को मिलता है, जिसकी उम्मीद जॉली एलएलबी फ्रैंचाइजी से हमेशा रही है। यह पहली बार है जब अक्षय कुमार और अरशद वारसी एक ही फिल्म में अपने-अपने जॉली किरदारों में साथ नजर आ रहे हैं। दो अलग-अलग फिल्मों के दो अलग वकील अब एक ही अदालत में आमने-सामने हैं, और दर्शकों को यही मुकाबला सबसे ज्यादा उत्साहित कर रहा है। फिल्म की एक और बड़ी बात यह है कि इसमें ओरिजनल हीरोइनों को बरकरार रखा गया है। पहले ऐसी चर्चा थी कि इलियाना डिक्रूज को हटाकर वाणी कपूर को लिया जाएगा, जिससे दर्शकों में नाराजगी देखी गई थी। लेकिन अब ट्रेलर में साफ हो गया है कि हुमा कुरैशी एक बार फिर अक्षय कुमार की पत्नी के रूप में नजर आएंगी और अमृता राव अरशद वारसी की पत्नी के रूप में वापसी कर रही हैं। इससे दर्शकों को एक तरह की नॉस्टैल्जिक कनेक्शन भी महसूस होगा।
गजराज राव का बदला अंदाज
गजराज राव, जो आमतौर पर कॉमिक और पॉजिटिव किरदारों में नजर आते हैं, इस बार एक नेगेटिव शेड में दिख रहे हैं। उनका व्यापारी वाला किरदार कहानी में तनाव और गंभीरता को और गहराता है। वहीं, अनुभवी अदाकारा सीमा बिस्वास भी एक सशक्त भूमिका में नजर आने वाली हैं, जो फिल्म को और अधिक गहराई दे सकती है। ‘जॉली एलएलबी 3Ó का ट्रेलर दर्शाता है कि यह फिल्म केवल हंसी-मजाक नहीं, बल्कि एक सोचने पर मजबूर करने वाली सामाजिक टिप्पणी भी है। किसानों की दुर्दशा, भ्रष्टाचार और न्याय प्रणाली की खामियां, इन सबको हास्य के लहजे में दर्शाने की कोशिश की गई है।
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