प्रदेश के विधायक होंगे ऑनलाइन : एक क्लिक में भेज सकेंगे विकास प्रस्ताव

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      भिलाई (AkhandBharatHNKP.Com)। छत्तीसगढ़ में विकास कार्यों की प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए राज्य सरकार जल्द ही सभी विधायकों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोडऩे जा रही है। इसके तहत प्रदेश के सभी 90 विधायकों और प्रभारी मंत्रियों को लॉग-इन आईडी प्रदान की जाएगी, जिसके माध्यम से वे अपने क्षेत्र के विकास कार्यों के प्रस्ताव सीधे शासन-प्रशासन तक भेज सकेंगे।

          नई व्यवस्था लागू होने के बाद विकास प्रस्तावों को मंजूरी के लिए महीनों लगने वाली प्रक्रिया घटकर एक से दो दिन में पूरी हो सकेगी। इससे न केवल विकास कार्यों में तेजी आएगी, बल्कि फाइल तैयार करने, डाक भेजने और अन्य कागजी कार्यवाही पर होने वाले खर्च में भी कमी आएगी। वर्तमान में विधायक निधि से सड़क, नाली, वाटर एटीएम, स्कूल भवन जैसे कार्यों के लिए प्रस्ताव तैयार कर जिला प्रशासन के माध्यम से शासन को भेजे जाते हैं। इस प्रक्रिया में कई स्तरों पर पत्राचार और अनुमोदन में लंबा समय लग जाता है। नई प्रणाली में विधायक अपनी आईडी के जरिए सीधे प्रस्ताव अपलोड करेंगे, जो संबंधित विभागों तक तुरंत पहुंच जाएगा।

          3.60 करोड़ रुपए तक बचत का अनुमान

          एक विधायक को प्रतिवर्ष 4 करोड़ रुपए की विधायक निधि मिलती है, जिसमें से कुछ राशि स्टेशनरी और प्रशासनिक खर्चों में खर्च होती है। अनुमान है कि ऑनलाइन प्रणाली लागू होने से प्रति विधायक करीब 4 लाख रुपए की बचत होगी। इस हिसाब से प्रदेश के 90 विधायकों के स्तर पर लगभग 3 करोड़ 60 लाख रुपए की बचत संभव है।

          सॉफ्टवेयर से जुड़े रहेंगे सभी विभाग

          राज्य शासन द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर में सभी 90 विधायक, 13 प्रभारी मंत्री, 33 जिलों का प्रशासन, स्टेट नोडल एजेंसियां और क्रियान्वयन एजेंसियां—जैसे नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, शिक्षा विभाग, आरईएस और पीएचई—आपस में ऑनलाइन जुड़े रहेंगे। प्रस्ताव जिला प्रशासन के माध्यम से संबंधित विभाग तक पहुंचेगा, जहां जांच के बाद उसे शासन को अग्रेषित किया जाएगा। स्वीकृति मिलने पर कार्यान्वयन एजेंसी को सीधे जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने से कार्यों की शुरुआत से अंत तक ट्रैकिंग भी संभव होगी।

          विधायक निधि में लगातार बढ़ोतरी

          विधायक निधि में पिछले दो दशकों में लगातार वृद्धि हुई है। वर्ष 2004-05 में यह राशि 50 लाख रुपए थी, जो 2011-12 में बढ़कर 1 करोड़ और 2019-20 में 2 करोड़ हो गई। वर्ष 2022-23 में इसे बढ़ाकर 4 करोड़ रुपए कर दिया गया। सरकार का मानना है कि इस डिजिटल पहल से सुशासन को बढ़ावा मिलेगा, पारदर्शिता और दक्षता में वृद्धि होगी तथा विकास कार्यों में उल्लेखनीय तेजी आएगी।

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