कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष अनुसंधान, महत्वपूर्ण खनिज और जनजातीय स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में होगा काम
रायपुर (AkhandBharatHNKP.Com)। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर में तकनीकी शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान को नई दिशा देने के उद्देश्य से सात अत्याधुनिक अनुसंधान केंद्रों की शुरुआत की गई। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने इन केंद्रों का उद्घाटन किया। इनकी स्थापना से छत्तीसगढ़ में आधुनिक तकनीक, नवाचार और उद्योग आधारित अनुसंधान को बढ़ावा मिलने के साथ प्रदेश के विद्यार्थियों और युवा शोधार्थियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विज्ञान, आधुनिक तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश अब केवल नई तकनीकों का उपयोग करने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने अनुसंधान और तकनीकी समाधानों के माध्यम से वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करने की दिशा में प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आज शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग और प्रशासन सहित अनेक क्षेत्रों में बदलाव का प्रमुख माध्यम बन रही है। ऐसे दौर में युवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ना और उन्हें बेहतर अनुसंधान सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है। विकसित भारत के निर्माण में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की अहम भूमिका होगी तथा युवा प्रतिभाएं इस बदलाव की सबसे बड़ी ताकत बनेंगी। कार्यक्रम में सांसद बृजमोहन अग्रवाल, सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. नल्लाथंबी कलाइसेल्वी, चेयरपर्सन डॉ. सुरेश हावरे, एनआईटी रायपुर के निदेशक डॉ. एन. वी. रमन्ना राव सहित विभिन्न संस्थानों के अधिकारी-कर्मचारी, स्टार्टअप प्रतिनिधि, शोधार्थी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
छत्तीसगढ़ में तकनीकी विकास की अपार संभावनाएं
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों, खनिज संपदा और प्रतिभाशाली युवाओं से समृद्ध प्रदेश है। यहां वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक तकनीकों के विकास की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से प्रदेश को अनुसंधान एवं नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है। उन्होंने महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में शोध की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि स्वच्छ ऊर्जा, विद्युत वाहनों और आधुनिक उद्योगों के विकास में इन खनिजों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। इनके वैज्ञानिक उपयोग और नई तकनीकों के विकास से देश की आर्थिक एवं तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी।
स्वास्थ्य से लेकर अंतरिक्ष अनुसंधान तक होगा काम
रेड्डी ने कहा कि एनआईटी रायपुर में स्थापित ये केंद्र केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि विद्यार्थियों, वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और उद्योग जगत के बीच सहयोग का साझा मंच बनेंगे। इससे नई तकनीकों के विकास, व्यावहारिक समस्याओं के समाधान और नए उद्यमों की स्थापना को प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने ग्रामीण एवं जनजातीय स्वास्थ्य के क्षेत्र में अनुसंधान को छत्तीसगढ़ के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया। आधुनिक तकनीक के माध्यम से दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। वहीं अंतरिक्ष विज्ञान, एयरोस्पेस, नैनोसाइंस और सतत ऊर्जा के क्षेत्र में शोध से प्रदेश के युवाओं को नए अवसर मिलेंगे।
इन सात अनुसंधान केंद्रों की हुई शुरुआत
एनआईटी रायपुर में उद्घाटित सात केंद्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए मेइटी इंडिया एआई छत्तीसगढ़ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, महत्वपूर्ण खनिजों पर अनुसंधान के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन क्रिटिकल मिनरल्स, अंतरिक्ष एवं अंतरग्रहीय अन्वेषण केंद्र, एयरोस्पेस एवं स्वायत्त तकनीक केंद्र, ग्रामीण एवं जनजातीय स्वास्थ्य में नवाचार के लिए मैराल सेंटर, कंप्यूटेशनल मैकेनिक्स केंद्र तथा नैनोसाइंस एवं सतत ऊर्जा प्रौद्योगिकी केंद्र शामिल हैं।
स्टार्टअप और उद्यमिता को भी मिलेगा बढ़ावा
इन केंद्रों की स्थापना से प्रदेश में तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप अनुसंधान को विस्तार मिलने की उम्मीद है। उच्च शिक्षण संस्थानों और उद्योगों के बीच साझेदारी मजबूत होने से शोध आधारित तकनीकों को व्यावहारिक रूप देने तथा स्टार्टअप और उद्यमिता को बढ़ावा देने के नए अवसर तैयार होंगे। केंद्रीय मंत्री ने विश्वास जताया कि ये सातों केंद्र आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के तकनीकी और औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। उन्होंने विद्यार्थियों और युवा शोधार्थियों से वैज्ञानिक सोच, नवाचार और उद्यमिता को अपनाकर विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने की सौजन्य मुलाकात

