
300 से ज्यादा भारतीयों की तलाश जारी, कंक्रीट के 22 पुल, 42 किमी सड़क भी बही
काठमांडू (एजेंसी)। नेपाल-तिब्बत सीमा पर बुधवार सुबह पहाड़ का बड़ा हिस्सा नदी में गिरने के बाद अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। हादसे में नेपाल और तिब्बत में अब तक 210 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इनमें नेपाल के 207 और तिब्बत के 3 लोग शामिल हैं। करीब 1,500 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।


नेपाल में 900 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी है। इनमें 28 देशों के करीब 500 विदेशी नागरिक शामिल हैं। नेपाली अधिकारियों के मुताबिक, लापता लोगों में 300 से ज्यादा भारतीय भी हैं। खराब मौसम, मलबे और क्षतिग्रस्त रास्तों के कारण राहत एवं बचाव अभियान में मुश्किलें आ रही हैं। नेपाली सेना ने रसुवा जिले के टिमुरे इलाके से गुरुवार सुबह 116 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। इनमें 95 नेपाली नागरिक और 21 भारतीय शामिल हैं। वहीं, रसुवा के हाकू इलाके में हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे सात लोगों को भी सेना ने सुरक्षित बचा लिया है। अन्य सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने का अभियान जारी है। तिब्बत में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। चीन की सरकारी वेबसाइट CCTV के मुताबिक, वहां 550 से ज्यादा लोगों का अब तक सुराग नहीं मिल पाया है।
लैंडस्लाइड से नदी का रास्ता रुका, फिर आई तेज बाढ़
बुधवार सुबह करीब 8:37 बजे नेपाल-चीन सीमा के पास तेज झटके महसूस किए गए थे। शुरुआत में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने इसे 4.4 तीव्रता का भूकंप बताया था। बाद में सामने आया कि पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा बर्फ और चट्टानों के साथ ल्हेंदे खोला नदी में गिर गया था। ल्हेंदे खोला, भोटेकोशी नदी की सहायक नदी है। लैंडस्लाइड के कारण नदी का प्रवाह प्रभावित हुआ और इसके बाद अचानक पानी और मलबे का तेज बहाव नीचे की ओर आया। USGS ने बाद में स्पष्ट किया कि महसूस किया गया 5.2 तीव्रता जैसा झटका लैंडस्लाइड के कारण पैदा हुआ था।
30 फीट तक उठीं पानी की लहरें, घर और सड़कें तबाह
बाढ़ का पानी और मलबा इतनी तेजी से नीचे आया कि लोगों को जान बचाने के लिए ऊंची इमारतों और सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा। कई इलाकों में पानी की लहरें करीब 30 फीट तक ऊंची बताई गईं। नुवाकोट के त्रिशूली और देवीघाट समेत कई इलाकों में घर, सड़कें और वाहन मलबे में दब गए हैं। बाढ़ का पानी उतरने के बाद जगह-जगह कीचड़ और मलबा जमा है। प्रभावित क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे हैं।
भारत ने भेजी 47.5 टन राहत सामग्री
नेपाल में आई इस आपदा के बाद भारत ने राहत और बचाव के लिए मदद बढ़ा दी है। भारतीय वायुसेना के विमान से 37.5 टन राहत सामग्री, जरूरी दवाइयां और खाद्य पैकेट नेपाल भेजे गए हैं। इससे पहले बुधवार रात C-130J विमान के जरिए 10 टन राहत सामग्री और दवाइयों की पहली खेप काठमांडू भेजी गई थी। दोनों खेपों को मिलाकर भारत अब तक 47.5 टन राहत सामग्री नेपाल भेज चुका है। वहीं, NDRF की टीमें भी स्टैंडबाय पर हैं। NDRF के IG नरेंद्र सिंह बुंदेला के मुताबिक, नेपाल सरकार की ओर से मदद का अनुरोध और भारत सरकार की मंजूरी मिलने पर टीमें तत्काल नेपाल रवाना की जा सकती हैं।
चीन की रेस्क्यू टीम भी पहुंची

करीब 22 घंटे तक रास्ता बंद रहने के बाद चीनी बचाव दल ग्यिरोंग पोर्ट पहुंच गया। पहली टीम में 141 सदस्य शामिल हैं। राहत अभियान के लिए Mi-171 हेलिकॉप्टर भी तैनात किया गया है। टीम अब मलबे और कीचड़ में फंसे लोगों की तलाश करेगी। बाढ़ से ग्यिरोंग पोर्ट और सीमा क्षेत्र का बुनियादी ढांचा भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई पुल और सड़कें क्षतिग्रस्त होने से नेपाल और चीन के बीच व्यापार पर भी असर पड़ा है।
प्रधानमंत्री बालेन शाह ने प्रभावित इलाकों का लिया जायजा
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह गुरुवार सुबह बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने नुवाकोट के बिदुर के लिए रवाना हुए। उनके साथ मंत्री सुनील लामसाल भी मौजूद रहे। सरकार और सुरक्षा एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं। आपदा के बीच नेपाल में फंसे विदेशी नागरिकों को निकालने और लापता लोगों की तलाश पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
बिहार में असर, गंडक बैराज के 36 गेट खोले गए
नेपाल के रसुवा जिले में आई भीषण बाढ़ का असर बिहार में भी दिखने लगा है। भारी पानी आने के बाद पश्चिमी चंपारण के गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए हैं। बैराज से करीब 1.06 लाख क्यूसेक यानी 79.3 लाख लीटर प्रति सेकेंड पानी छोड़ा जा रहा है। पानी के तेज बहाव के साथ नेपाल से मलबा, घरेलू सामान और भैंसें तक बहकर गंडक बैराज पहुंच रही हैं। केंद्रीय जल आयोग ने गंडक में 3 मीटर तक ऊंची लहरों और फ्लैश फ्लड की आशंका जताई है। पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर में हाई अलर्ट जारी किया गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि खतरा अभी टला नहीं है, इसलिए लोग सतर्क रहें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन की त्रासदी पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जताया दुख

