रायपुर (AkhandBharatHNKP.Com)। छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों को हॉस्टल की कमी के कारण होने वाली परेशानी से राहत मिलने वाली है। राज्य सरकार जल्द ही मुख्यमंत्री शिक्षा सहयोग योजना लागू करने जा रही है, जिसके तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के स्नातक एवं स्नातकोत्तर छात्रों को किराये के मकान के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी। योजना का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है और इसे जून से शुरू होने वाले शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू करने की तैयारी है।

योजना के लागू होने के बाद छात्र अपने कॉलेज या विश्वविद्यालय के पास किराये के मकान में रहकर पढ़ाई कर सकेंगे। इसके लिए राजधानी रायपुर में पढऩे वाले छात्रों को प्रतिमाह 3,000 रुपए, जबकि बिलासपुर, दुर्ग, बस्तर और सरगुजा जैसे संभागीय मुख्यालयों में 2,500 रुपए और जिला एवं विकासखंड मुख्यालयों में पढऩे वाले छात्रों को 2,000 रुपए प्रतिमाह सहायता दी जाएगी। यह राशि वर्ष में 10 महीने के लिए तीन किश्तों में प्रदान की जाएगी। अब तक पोस्ट मैट्रिक छात्रावासों में सीमित सीटों के कारण बड़ी संख्या में छात्र प्रवेश से वंचित रह जाते थे। उन्हें दूरस्थ छात्रावासों में रहना पड़ता था या निजी तौर पर महंगे किराये के मकान लेने पड़ते थे। इस समस्या को देखते हुए सरकार ने पुरानी छात्रावास व्यवस्था में बदलाव करते हुए यह नई योजना शुरू करने का निर्णय लिया है।
पात्रता और शर्तें
योजना का लाभ उन्हीं छात्रों को मिलेगा जिनके परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपए से कम है। चयन मेरिट के आधार पर किया जाएगा। स्नातक में प्रवेश के लिए 12वीं में प्रथम श्रेणी तथा स्नातकोत्तर के लिए स्नातक में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक अनिवार्य होंगे। वहीं, किसी सरकारी या निजी छात्रावास, अनुदान प्राप्त या अन्य संस्थागत भवन में रहने वाले छात्र इस योजना के पात्र नहीं होंगे।
अधिकतम 6 वर्ष तक मिलेगा लाभ
इस योजना के तहत स्नातक पाठ्यक्रम के लिए अधिकतम 4 वर्ष और स्नातकोत्तर के लिए 2 वर्ष, यानी कुल 6 वर्ष तक सहायता दी जाएगी। प्रदेश के 343 शासकीय कॉलेजों में कुल 2.88 लाख छात्र अध्ययनरत हैं, जिनमें एसटी वर्ग के 74 हजार, एससी वर्ग के 44 हजार, ओबीसी वर्ग के 1.41 लाख और सामान्य वर्ग के करीब 29 हजार छात्र शामिल हैं। आदिम जाति विकास विभाग की प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने बताया कि योजना का उद्देश्य उच्च शिक्षा को बढ़ावा देना और छात्रों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसके लिए विस्तृत गाइडलाइन जल्द जारी की जाएगी।

