जहाँ निर्मल भाव होता है, वहीं गुरु कृपा और ईश्वर का वास होता है

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          भाव

          मनुष्य के जीवन में  भावनाएं ही सबसे बड़ी शक्ति हैं बंधू।
          जैसा भाव हमारे भीतर होता है, वैसा ही हमारा विचार, कर्म और जीवन बनता चला जाता है।
          ईश्वर भी शब्दों से नहीं, सच्चे भाव से प्रसन्न होते हैं।
          प्रेम का भाव सेवा बनता है, करुणा का भाव मानवता बनता है और समर्पण का भाव भक्ति बन जाता है।
          इसलिए अपने मन में सदैव अच्छे भाव रखें, क्योंकि भाव ही हमारी चेतना, कर्म और भाग्य का निर्माण करते हैं।
          जहाँ निर्मल भाव होता है, वहीं गुरु कृपा और ईश्वर का वास होता है।
          !!🌺जय मां गुरू 🌺!!

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