64 टेस्ट मैचों में झटके 229 विकेट, पदार्पण और संन्यास की तारीख रही एक ही; 2013 में वेस्टइंडीज के खिलाफ शुरू किया था टेस्ट करियर
नई दिल्ली (एजेंसी)। भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया है। शुक्रवार को उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर इसकी जानकारी दी। शमी ने अपने 13 साल के टेस्ट करियर में 64 मुकाबले खेले और 229 विकेट हासिल किए। हालांकि, वह वनडे और टी-20 क्रिकेट में भारत के लिए खेलना जारी रखेंगे।
संयोग की बात है कि शमी ने 6 नवंबर 2013 को वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया था और 6 नवंबर 2026 को इसी प्रारूप से संन्यास की घोषणा की। 36 वर्षीय शमी ने अपने संदेश में कहा कि भारी मन और अनगिनत यादों के साथ वह टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह रहे हैं। उन्होंने लिखा कि जब पहली बार भारत की टेस्ट जर्सी पहनी थी, तब उनका सपना देश के लिए कुछ कर दिखाना था। इस सफर में मिले हर विकेट, संघर्ष, चोट और वापसी ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया। शमी ने स्पष्ट किया है कि टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के बावजूद वह क्रिकेट खेलना जारी रखेंगे। वह एकदिवसीय और टी-20 प्रारूप के साथ आईपीएल तथा घरेलू क्रिकेट में भी हिस्सा लेंगे। जरूरत पड़ने पर अपनी फिटनेस बनाए रखने के लिए चार दिवसीय प्रथम श्रेणी मुकाबले भी खेल सकते हैं। उन्होंने कहा कि टेस्ट क्रिकेट उनके लिए महज एक प्रारूप नहीं, बल्कि जिंदगी का बेहद खास हिस्सा रहा है। मैदान पर उनकी आखिरी टेस्ट गेंद भले ही फेंकी जा चुकी हो, लेकिन भारत के लिए खेलने का गौरव हमेशा उनके दिल में रहेगा।
पदार्पण मुकाबले में ही झटके थे 9 विकेट
मोहम्मद शमी ने 6 नवंबर 2013 को कोलकाता के ईडन गार्डन्स मैदान पर वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना पहला टेस्ट मैच खेला था। अपने पदार्पण मुकाबले में ही उन्होंने शानदार गेंदबाजी करते हुए कुल 9 विकेट हासिल किए थे। अपने टेस्ट करियर के दौरान शमी छह बार एक पारी में पांच या उससे अधिक विकेट लेने में सफल रहे। एक पारी में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 56 रन देकर छह विकेट रहा। कुल टेस्ट विकेट लेने के मामले में वह भारतीय गेंदबाजों की सूची में 12वें और तेज गेंदबाजों में छठे स्थान पर रहे।
विश्व कप के बाद चोटों ने बढ़ाई मुश्किलें
वर्ष 2023 के एकदिवसीय विश्व कप में शमी भारतीय टीम के सबसे सफल गेंदबाजों में शामिल रहे थे। उन्होंने सात मुकाबलों में 24 विकेट लेकर अपनी गेंदबाजी का दम दिखाया था। इसके बाद टखने की चोट के कारण उन्हें शल्य चिकित्सा करानी पड़ी। घुटने की परेशानी के चलते भी उनकी वापसी में देरी हुई। जनवरी 2025 में उन्होंने टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की और इसके बाद चैंपियंस ट्रॉफी की टीम में भी जगह बनाई। न्यूजीलैंड के खिलाफ फाइनल मुकाबला उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच रहा। इसके बाद से वह भारतीय टीम के लिए किसी भी प्रारूप में नहीं खेले। हालांकि, शमी घरेलू क्रिकेट में बंगाल की ओर से लगातार खेलते रहे। हाल ही में रणजी ट्रॉफी के शुरुआती मुकाबले में दिल्ली के खिलाफ उन्होंने पांच विकेट हासिल किए थे। इसके बावजूद न्यूजीलैंड दौरे से पहले होने वाले चार दिवसीय मुकाबलों के लिए भारत-ए टीम में उन्हें जगह नहीं मिली। भारतीय टीम की टेस्ट योजनाओं में भी उनका नाम शामिल नहीं था।
64 टेस्ट, 229 विकेट और यादगार उपलब्धियां
मोहम्मद शमी का टेस्ट करियर भारतीय क्रिकेट के लिए कई यादगार प्रदर्शन लेकर आया। तेज गेंदबाजी, रिवर्स स्विंग और मुश्किल परिस्थितियों में विकेट निकालने की क्षमता के दम पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी खास पहचान बनाई। अब टेस्ट प्रारूप से विदाई के बाद प्रशंसकों की निगाहें उनके वनडे और टी-20 करियर पर रहेंगी।

