कोरबा (AkhandBharatHNKP.Com)। बालको-वेदांता के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के परिवारों के आवासों की कंपनी प्रबंधन द्वारा बिजली-पानी बंद करने, चिकित्सा सुविधा रोकने, सीवरेज लाइनों को चोक करने तथा सुरक्षा कर्मियों के माध्यम से मानसिक दबाव बनाने जैसी अमानवीय एवं अवैध कार्रवाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
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पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जिला कलेक्टर को विस्तृत पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप करने की अपेक्षा की है। उन्होंने कहा कि प्रबंधन का यह रवैया अमानवीय, अवैध और संविधान प्रदत्त सम्मानजनक जीवन के अधिकार के प्रतिकूल है। जिला प्रशासन को चाहिए कि बच्चों की शिक्षा एवं परिवारों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तत्काल हस्तक्षेप करे।
संयंत्र को वर्षों तक समर्पित सेवा देने वाले इन सेवानिवृत्त कर्मचारियों के परिवार अपने अध्ययनरत बच्चों की शिक्षा बाधित न हो, इस उद्देश्य से केवल शैक्षणिक सत्र की समाप्ति तक कंपनी आवासों में निवासरत हैं। परिवारों की ओर से मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। इसके बावजूद प्रबंधन द्वारा 1 नवंबर 2025 से पुन: उत्पीडऩकारी गतिविधियां शुरू कर दी गईं। जबकि पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल द्वारा पहले लिखे गए पत्र में इक बात इज जप्र दिया गया था कि शिक्षण सत्र की समाप्ति तक कर्मचारियों को कंपनी आवासों में पूर्व सुविधाओं के साथ रहने दिया जाय, लेकिन प्रशासन द्वारा हस्तक्षेप किए जाने पर प्रबंधन द्वारा पूर्व में केवल 31 अक्टूबर तक आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के साथ कंपनी आवास में रहने की अनुमति प्रबंधन द्वारा प्रदान की गई थी।
मुख्य आरोपित कार्रवाईयों में बिजली आपूर्ति काटना, पानी की आपूर्ति रोकना, चिकित्सा सुविधाओं पर रोक, टॉयलेट एवं सीवरेज लाइनों को जानबूझकर चोक करना, बार-बार धमकियाँ, दबाव एवं मानसिक उत्पीडऩ से प्रभावित परिवारों में भारी आक्रोश है। परिवारों का कहना है कि शैक्षणिक सत्र के मध्य में बच्चों की पढ़ाई छोड़कर वैकल्पिक आवास की तलाश करना संभव नहीं है। ऐसी परिस्थितियों में प्रबंधन की कठोर कार्यवाही मानवीय मूल्यों, प्राकृतिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों के विरुद्ध है।
मुख्य अपेक्षाएं
- प्रभावित परिवारों को पूरे शैक्षणिक सत्र की समाप्ति तक सुरक्षित एवं सम्मानजनक निवास की अनुमति दी जाए।
- बिजली, पानी, चिकित्सा एवं अन्य सभी मूलभूत सुविधाओं की तत्काल बहाली कराई जाए।
- प्रबंधन की किसी भी प्रकार की उत्पीडऩकारी गतिविधि पर तुरंत रोक लगाई जाए।
- परिवारों की सुरक्षा, मानवीय गरिमा और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा हेतु आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।
- सेवानिवृत्त कर्मचारियों के परिवारों ने उम्मीद जताई है कि जिला प्रशासन मामले की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए शीघ्र निर्णय लेगा और बच्चों की शिक्षा एवं परिवारों की सुरक्षा को प्राथमिकता देग।
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