जहां आदिवासी मुख्यमंत्री हैं वहां आदिवासी किसान जहर खाने को मजबूर: सांसद

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      • कोरबा सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत किसान से मिलने पहुंची अस्पताल, राज्य सरकार पर साधा निशाना

          कोरबा (AkhandBharatHNKP.Com)। समर्थन मूल्य पर धान बेचने टोकन न कटने से परेशान किसान के आत्महत्या के प्रयास मामले में कोरबा सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत ने राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जहां आदिवासी मुख्यमंत्री हैं, वहां आदिवासी किसान जहर खाने को मजबूर हो रहा है। वहीं मामले में कलेक्टर कुणाल दुदावत ने पटवारी को निलंबित कर दिया है।तहसीलदार को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

          सांसद ज्योत्सना चरणदास महंतकोरबा सांसद ज्योत्सना महंत घटना की जानकारी मिलते ही मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचीं और किसान से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। सांसद ज्योत्सना महंत ने कहा कि जहां आदिवासी मुख्यमंत्री हैं, वहां आदिवासी किसान जहर खाने को मजबूर हो रहा है। जब हमारे अन्नदाता खतरे में हैं, तो हम सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस शासनकाल में किसानों को धान बेचने के लिए इस तरह की परेशानी नहीं झेलनी पड़ती थी और वर्तमान सरकार के दावे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। वहीं सांसद ज्योत्सना महंत ने किसान के समुचित इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित कराने के साथ-साथ धान खरीदी से जुड़ी समस्याओं का शीघ्र समाधान करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए प्रशासन को आवश्यक निर्देश दिए। इस दौरान जिला कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष मनोज चौहान, सांसद प्रतिनिधि हरीश परसाई, दिनेश सोनी, महेश अग्रवाल उपस्थित थे।

          पटवारी निलंबित, तहसीलदार को कारण बताओ नोटिस

          मामले में कलेक्टर ने संबंधित पटवारी को निलंबित कर दिया है, जबकि तहसीलदार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। कलेक्टर ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश देते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

          क्या है पूरा मामला?

          हरदी बाजार थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कोरबी गांव निवासी 40 वर्षीय किसान सुमेर सिंह गोड़ के पास करीब 3 एकड़ 75 डिसमिल भूमि है। इस साल उन्होंने 68 क्विंटल से अधिक धान का उत्पादन किया, लेकिन सरकारी खरीदी केंद्र में धान बेचने के लिए आवश्यक टोकन उन्हें लगातार नहीं मिल पा रहा था। किसान के पास मोबाइल फोन नहीं होने के कारण ऑनलाइन प्रक्रिया और भी जटिल हो गई। बार-बार प्रयासों के बावजूद जब समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो मानसिक रूप से टूट चुके किसान ने रविवार देर रात कीटनाशक पी लिया।

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