हाईकोर्ट का फैसला : शादी करने की सहमति से संबंध बनाना रेप नहीं

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      बिलासपुर (AkhandBharatHNKP.Com)। हाईकोर्ट के जस्टिस एनके व्यास ने शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने के मामले में अहम निर्णय सुनाते हुए कहा है कि यदि लड़की बालिग है और उसकी सहमति से संबंध बने हैं, तो इसे रेप नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने लोअर कोर्ट द्वारा आरोपी युवक को दोषी ठहराने का आदेश अवैध करार देते हुए उसे बरी कर दिया। इस फैसले के साथ ही करीब 20 साल बाद आरोपी को न्याय मिला।

          हाईकोर्ट

          मामला सरगुजा जिले के धौरपुर थाना क्षेत्र का है। साल 2000 में सरगुजा जिले की युवती 12वीं कक्षा की छात्रा थी और धौरपुर क्षेत्र में किराए के मकान में रहती थी। इसी दौरान लीना राम ध्रुव के साथ दोस्ती हुई और बाद में प्रेम संबंध बन गया। युवती ने आरोप लगाया कि युवक ने शादी का झांसा देकर उसके साथ तीन साल तक शारीरिक संबंध बनाए। पढ़ाई पूरी होने के बाद दोनों अपने गांव लौट गए। युवती के अनुसार दोनों ने मिलने का तय किया था और युवक ने उसे पत्नी की तरह रखा। लेकिन 11 जून 2003 को युवक उसे छोड़कर चला गया। इसके बाद युवती ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस जांच के बाद ट्रायल कोर्ट में चालान पेश किया गया। अंबिकापुर जिला-सत्र न्यायालय ने आरोपी को दोषी मानते हुए सात साल की सजा और 5,000 रुपए अर्थदंड लगाया।

          हाईकोर्ट में दायर की अपील

          अभियोजन के खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट में रिवीजन अपील दायर की। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल शादी का बहाना बनाकर शारीरिक संबंध बनाना हर मामले में दुष्कर्म नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पीडि़ता की उम्र 26 वर्ष थी और उसे परिणामों की पूरी जानकारी थी, इसलिए यह संबंध उसकी सहमति से बने माने जाएंगे।

          दो दशक बाद मिली राहत

          एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपी को 27 अगस्त 2004 को गिरफ्तार किया गया था। सत्र न्यायालय ने 23 अगस्त 2005 को सजा सुनाई थी, और 23 जनवरी 2006 को जमानत मिली। अब 20 साल की कानूनी प्रक्रिया के बाद हाईकोर्ट ने उसे दोषमुक्त कर दिया।

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