विभागीय मंत्री ने सांसद को जानकारी दी कि थर्मल पॉवर प्लांट को अप्रयुक्त संचित राख अर्थात लैगेशी ऐश का उपयोग क्रमिक रूप से करने को कहा गया है। 1 अप्रैल 2022 से 10 वर्ष के भीतर इसकी उपयोगिता तय होगी। सीएसईबी के हवाले से केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि हसदेव ताप विद्युत संयंत्र स्थित ऐश पांड को छोडक़र कोरबा जिले में उपयोग में नही आ रहे ऐश पांड को विद्युत कंपनी ने फिर से प्राप्त कर लिया है। वर्तमान में वहां संचित लैगेशी ऐश की कुल मात्रा 210.64 लाख मिट्रिक टन है।
वेब पोर्टल पर राख उत्पादन और उपयोगिता की मासिक जानकारी अपलोड नही
सांसद ने ऐश ट्रैक के जरिए फ्लाई ऐश के प्रबंधन और ट्रैकिंग के बारे में नतीजे की जानकारी मांगी। इस पर उन्हें बताया गया कि केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा विकसित वेब पोर्टल पर राख उत्पादन और उपयोगिता की मासिक जानकारी अपलोड करने आदेशित किया गया है। इसके साथ ही ताप विद्युत संयंत्रों और सीपीसीबी द्वारा अधिकृत लेखा परीक्षकों से राख निपटान के लिए वार्षिक अनुपालन लेखा परीक्षा की रिपोर्ट पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
जुर्माने की उपयोगिता पर्यावरण व स्वास्थ्य क्षेत्र में तय करने की मांग
लोकसभा की कार्यवाही में सांसद ज्योत्सना महंत ने विद्युत संयंत्रों से वसूले गए पर्यावरणीय जुर्माने की उपयोगिता पर्यावरण व स्वास्थ्य क्षेत्र में तय करने की मांग भी सरकार से की। इस पर केन्द्रीय मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने स्पष्ट किया कि राख उपयोग अधिसूचना 2021 के अंतर्गत थर्मल पॉवर प्लांट व अन्य मामलों में लापरवाही बरतने वालों से एकत्रित किए गए पर्यावरण मुआवजे की राशि का उपयोग राखड़ के सुरक्षित निपटान के लिए होता है। इसके अतिरिक्त राख आधारित उत्पाद सहित राख के उपयोग पर अनुसंधान को उन्नत बनाने में भी हो सकता है।