रायपुर (AkhandBharatHNKP.Com)। छत्तीसगढ़ में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून के तहत प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की मांग को लेकर निजी स्कूलों का असहयोग आंदोलन तेज हो गया है। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने साफ तौर पर ऐलान किया है कि अब वे आरटीई के तहत प्राप्त आवेदनों के सत्यापन कार्य में हिस्सा नहीं लेंगे।

बता दें कि एसोसिएशन की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक 1 मार्च को आयोजित की गई थी, जिसमें सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया। संगठन का कहना है कि जब तक स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा प्रतिपूर्ति राशि में वृद्धि नहीं की जाती, तब तक प्रदेशभर के निजी स्कूल असहयोग आंदोलन जारी रखेंगे। एसोसिएशन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन उच्च न्यायालय बिलासपुर में दायर याचिका क्रमांक डब्ल्यूपीसी 4988/2025 में 19 सितंबर 2025 को दिए गए आदेश के पालन तक जारी रहेगा। संगठन का आरोप है कि स्कूल शिक्षा विभाग न्यायालय के निर्देशों की अनदेखी कर रहा है।
कामकाम में नहीं देंगे सहयोग
आंदोलन के तहत निजी स्कूलों ने विभागीय कार्यों से दूरी बनाने का निर्णय लिया है। एसोसिएशन के मुताबिक, अब निजी स्कूल स्कूल शिक्षा विभाग, जिला शिक्षा अधिकारी और नोडल प्राचार्यों के किसी भी कार्य में सहयोग नहीं करेंगे। इसके साथ ही विभाग से प्राप्त होने वाले किसी भी पत्र, नोटिस या आदेश का जवाब भी नहीं दिया जाएगा। संगठन ने स्कूल शिक्षा विभाग पर आरोप लगाया है कि वह गरीब विद्यार्थियों की शिक्षा पर होने वाले खर्च को लेकर संवेदनहीन रवैया अपना रहा है। उनका कहना है कि वर्तमान प्रतिपूर्ति राशि कम होने के कारण निजी स्कूलों पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।
20 जिलों में सौंपे गए ज्ञापन
इधर, प्रदेश के 20 जिलों में निजी स्कूल संगठनों द्वारा जिला शिक्षा अधिकारियों को असहयोग आंदोलन से संबंधित ज्ञापन भी सौंपे जा चुके हैं। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, आंदोलन इसी तरह जारी रहेगा, जिससे आरटीई से जुड़ी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
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