ईडी की कार्रवाई : शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश कर खपाई गई कथित अवैध कमाई, तीन दिन की रिमांड पर आरोपी
रायपुर (AkhandBharatHNKP.Com)। भारतमाला परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण मुआवजा वितरण में हुए कथित करोड़ों रुपये के घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अभनपुर के जमीन कारोबारी जय प्रकाश गांधी को गिरफ्तार किया है। ईडी ने आरोपी को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार कर विशेष न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे तीन दिन की रिमांड पर भेजा गया है।

ईडी की जांच में सामने आया है कि आरोपी ने अपने परिजनों और कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर कथित साजिश रचते हुए हाईवे अलाइनमेंट में आने वाली भूमि को छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित किया। आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए 56 लाख 76 हजार रुपये की पात्र भूमि पर 9 करोड़ 83 लाख रुपये का मुआवजा प्राप्त किया गया। जांच एजेंसी के अनुसार नियमों के तहत जिस भूमि के लिए करीब 56 लाख रुपये का मुआवजा मिलना था, उसके बदले आरोपी और उसके परिवार ने लगभग 9.83 करोड़ रुपये हासिल किए। इस तरह करीब 9.27 करोड़ रुपये की अवैध आय अर्जित किए जाने का दावा किया गया है। मामले की जांच छत्तीसगढ़ एसीबी और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई। यह प्रकरण रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजा वितरण में कथित अनियमितताओं और धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है।
निवेश के जरिए छिपाई गई रकम
ईडी का आरोप है कि घोटाले से अर्जित राशि को वैध दिखाने के उद्देश्य से शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय साधनों में निवेश किया गया। एजेंसी इसे मनी लॉन्ड्रिंग की प्रक्रिया का हिस्सा मान रही है। इससे पहले 28 अप्रैल को ईडी ने रायपुर, अभनपुर और धमतरी जिले में कई ठिकानों पर छापेमारी कर महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और अन्य साक्ष्य जब्त किए थे। ईडी अब मामले में शामिल अन्य लाभार्थियों, बिचौलियों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। एजेंसी का मानना है कि मुआवजा घोटाले में कई स्तरों पर मिलीभगत की संभावना है।
ऐसे सामने आया मुआवजा घोटाला
जांच में खुलासा हुआ है कि भारतमाला परियोजना के लिए अधिग्रहित भूमि को कृत्रिम रूप से छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर मुआवजा राशि बढ़ाई गई। अभनपुर क्षेत्र के नायकबांधा और उरला गांवों में भूमि को 159 खसरों में विभाजित कर रिकॉर्ड में करीब 80 नए नाम दर्ज किए गए। इससे भूमि का मुआवजा कई गुना बढ़ गया। राजस्व विभाग के अनुसार जिस भूमि का मुआवजा लगभग 29.50 करोड़ रुपये होना चाहिए था, उसकी राशि बढ़कर 70 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गई। अभनपुर बेल्ट में 9.38 किलोमीटर क्षेत्र के लिए 324 करोड़ रुपये मुआवजा निर्धारित किया गया था, जिसमें से 246 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जबकि 78 करोड़ रुपये का भुगतान फिलहाल रोक दिया गया है।
अधिकारियों पर भी गिरी थी गाज
मामले में जांच के बाद कई अधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी है। पूर्व में डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे और निगम आयुक्त निर्भय साहू को निलंबित किया गया था। जांच रिपोर्ट में 43 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। मामले में राजस्व अधिकारियों, पटवारियों और कथित भू-माफिया गठजोड़ की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
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