नई दिल्ली (एजेंसी)। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के सदस्यों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में वैश्विक हालात के बीच भारत की आर्थिक मजबूती बनाए रखने, विकास दर को गति देने और भविष्य की चुनौतियों से निपटने की रणनीति पर विस्तृत चर्चा की गई।
सूत्रों के अनुसार, बैठक का प्रमुख उद्देश्य बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी संभावित चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के उपाय तलाशना था। प्रधानमंत्री ने आर्थिक सुधारों को गति देने तथा आम नागरिकों के जीवन को अधिक सुगम बनाने पर विशेष जोर दिया। बैठक में देश में निवेश, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक सुधारों पर विचार-विमर्श किया गया। परिषद के सदस्यों ने सुझाव दिया कि आर्थिक विकास की रफ्तार बनाए रखने के साथ-साथ ‘ईज ऑफ लिविंग’ और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को और बेहतर बनाने के लिए निरंतर सुधार आवश्यक हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत को विकास की नई संभावनाओं का लाभ उठाने के लिए तैयार रहना होगा और आर्थिक सुधारों की गति बनाए रखनी होगी।
पश्चिम एशिया के हालात पर विशेष चर्चा
बैठक में पश्चिम एशिया में जारी तनाव और उसके वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों का भी आकलन किया गया। विशेषज्ञों ने ऊर्जा आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, समुद्री परिवहन और वैश्विक बाजारों में संभावित उतार-चढ़ाव को लेकर अपने विचार साझा किए। परिषद ने इस बात पर भी चर्चा की कि भू-राजनीतिक घटनाक्रमों का भारत की अर्थव्यवस्था, निर्यात-आयात और ऊर्जा सुरक्षा पर क्या प्रभाव पड़ सकता है तथा इन चुनौतियों से निपटने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जा सकते हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ी चिंता
बैठक ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। खासकर Strait of Hormuz को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बनी हुई है। यह जलमार्ग दुनिया के तेल और प्राकृतिक गैस व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान के कुछ ड्रोन मार गिराने और तटीय निगरानी ठिकानों पर कार्रवाई का दावा किया है। इसके बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों के साथ-साथ कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ सकता है।
भारत की प्राथमिकता: आर्थिक स्थिरता और विकास
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि भारत सरकार वैश्विक चुनौतियों पर लगातार नजर बनाए हुए है और आर्थिक स्थिरता के साथ विकास की गति को बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने को तैयार है। परिषद के सदस्यों ने भी बदलते वैश्विक हालात में भारत के लिए संभावित अवसरों और चुनौतियों पर अपने सुझाव प्रस्तुत किए। सरकार का लक्ष्य वैश्विक संकटों के प्रभाव को न्यूनतम रखते हुए देश की विकास यात्रा को निरंतर आगे बढ़ाना और नागरिकों के जीवन को अधिक सुगम बनाना है।

