परिवार के विरोध में दर्ज हुआ केस, 7 महीने जेल में रहने के बाद केंद्रीय जेल परिसर में हुआ विवाह, पुलिसकर्मी ने निभाई कन्यादान की रस्म
जगदलपुर (AkhandBharatHNKP.Com)। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले से प्रेम, कानून और न्यायिक प्रक्रिया का एक अनोखा मामला सामने आया है। जिस युवक पर युवती ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी, उसी युवक से उसने अदालत की अनुमति के बाद जगदलपुर केंद्रीय जेल में सात फेरे लेकर विवाह कर लिया। विवाह के बाद दूल्हे को दोबारा जेल भेज दिया गया। उसकी रिहाई कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद होगी।

बता दे की परपा थाना क्षेत्र के राजूर गांव निवासी युवक और युवती जगदलपुर के एक पेट्रोल पंप पर साथ काम करते थे। साथ काम करते-करते दोनों के बीच दोस्ती हुई, जो धीरे-धीरे प्रेम संबंध में बदल गई। दोनों ने विवाह करने का फैसला किया, लेकिन युवक के परिजनों ने इस रिश्ते का विरोध कर दिया। इसके बाद युवती ने शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगाते हुए युवक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी। मामले में एससी/एसटी एक्ट भी जुड़ने के कारण युवक पिछले सात महीने से केंद्रीय जेल में बंद था। युवक के जेल जाने के बाद भी युवती उससे लगातार मिलने जाती रही। दोनों के बीच बातचीत हुई और उन्होंने अपने रिश्ते को विवाह का रूप देने का निर्णय लिया। इसके बाद युवती ने अधिवक्ता की मदद से न्यायालय में संयुक्त आवेदन प्रस्तुत कर विवाह की अनुमति मांगी। दोनों के बालिग होने और आपसी सहमति को देखते हुए विशेष न्यायाधीश (एट्रोसिटी) ने जेल नियमावली के तहत विवाह कराने का आदेश दिया।
जेल परिसर में सजा मंडप, वैदिक रीति-रिवाज से हुआ विवाह
कोर्ट के निर्देश के बाद केंद्रीय जेल परिसर में मंडप सजाया गया और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ दोनों का विवाह संपन्न कराया गया। समारोह में जेल प्रशासन, पुलिस अधिकारी, अधिवक्ता और दोनों पक्षों के परिजन मौजूद रहे। विवाह के दौरान एक पुलिसकर्मी ने कन्यादान की रस्म निभाई। सभी वैवाहिक रस्में पूरी होने के बाद युवक को फिर से जेल भेज दिया गया।
शादी से इनकार पर समाज में हुई बदनामी
युवती ने बताया कि युवक ने पहले उससे प्रेम विवाह का वादा किया था, लेकिन बाद में पारिवारिक दबाव के चलते शादी से इनकार कर दिया। इससे उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई और मजबूर होकर उसने कानूनी कार्रवाई की। बाद में दोनों के बीच सुलह हुई और उन्होंने विवाह करने का निर्णय लिया। अब वह चाहती है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसके पति जल्द जेल से रिहा हो जाएं। युवक ने बताया कि परिवार की असहमति के चलते विवाद बढ़ा और मामला थाने तक पहुंच गया। जेल में रहने के दौरान दोनों ने रिश्ते को आगे बढ़ाने का फैसला किया और कानूनी प्रक्रिया के तहत विवाह कर लिया। उसने कहा कि अब दोनों नए जीवन की शुरुआत करना चाहते हैं।
कोर्ट के आदेश पर हुई पूरी प्रक्रिया
मामले में अधिवक्ता अवधेश झा ने बताया कि पीड़िता और आरोपी दोनों ने संयुक्त रूप से विवाह की अनुमति के लिए आवेदन दिया था। न्यायालय ने दोनों की सहमति और जेल नियमावली को ध्यान में रखते हुए विवाह कराने के निर्देश दिए, जिसके बाद केंद्रीय जेल प्रशासन ने सभी आवश्यक व्यवस्थाएं कीं।
केंद्रीय जेल में पहली बार हुआ ऐसा विवाह
केंद्रीय जेल अधीक्षक एस.एल. नायर ने बताया कि जगदलपुर केंद्रीय जेल के इतिहास में यह पहला अवसर है, जब न्यायालय की अनुमति से किसी बंदी का विवाह जेल परिसर में कराया गया। उन्होंने कहा कि सभी कानूनी औपचारिकताओं का पालन करते हुए विवाह संपन्न कराया गया।
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