बिलासपुर (AkhandBharatHNKP.Com)। सरकारी स्कूलों में संचालित प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (मिड-डे मील) योजना में कथित अनियमितताओं को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कड़ा जवाब तलब किया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सवाल उठाया कि जब बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के लिए सप्ताह में तीन दिन 20 ग्राम मिलेट चिक्की (बाजरा, कोदो-कुटकी) देने का निर्णय लिया गया है, तो इसका लाभ केवल सात जिलों तक ही सीमित क्यों है। अदालत ने पूछा कि शेष 26 जिलों के बच्चों को इस सुविधा से बाहर रखने का क्या औचित्य है।
स्कूलों में मिड-डे मील योजना में अव्यवस्था और अनियमितताओं की लगातार सामने आ रही खबरों को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने संज्ञान लेकर जनहित याचिका के रूप में मामले की सुनवाई शुरू की। अदालत ने योजना की हकीकत जानने के लिए न्यायमित्र नियुक्त किया, जिन्होंने अपनी रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण तथ्य अदालत के समक्ष रखे। न्यायमित्र ने मुख्य सचिव के शपथ पत्र का हवाला देते हुए बताया कि वर्तमान में 20 ग्राम मिलेट चिक्की का वितरण केवल नियद नेल्लानार योजना के पांच जिलों के साथ जशपुर और रायगढ़ सहित कुल सात जिलों में किया जा रहा है।
सरकार ने बताया सुधार का रोडमैप
मुख्य सचिव ने हाईकोर्ट में दायर शपथ पत्र में बताया कि 18 जून 2026 को उनकी अध्यक्षता में पीएम पोषण योजना की समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में शिक्षा, खाद्य, कृषि, वित्त, महिला एवं बाल विकास तथा स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ रायपुर और कोंडागांव के कलेक्टर भी शामिल हुए। इस दौरान योजना को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई।
डिजिटल होगी खाद्यान्न वितरण व्यवस्था
सरकार ने बताया कि मिड-डे मील योजना में गड़बडिय़ों और खाद्यान्न की चोरी रोकने के लिए अब पूरी व्यवस्था डिजिटल की जा रही है। कूपन प्रणाली समाप्त कर पीएम पोषण पोर्टल के माध्यम से खाद्यान्न आवंटन किया जाएगा। राशन प्राप्त होने के बाद स्कूलों के शिक्षक पोर्टल पर डिजिटल पावती दर्ज करेंगे। साथ ही जिलों और विकासखंडों के प्रदर्शन की निगरानी भी ऑनलाइन की जाएगी। इसके अलावा न्योता भोजन अभियान को भी व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी, जिसमें सरकार को अदालत के सवालों का विस्तृत जवाब प्रस्तुत करना होगा।

