बिलासपुर (AkhandBharatHNKP.Com)। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 23 साल पुराने रिश्वत मामले में दोषी पूर्व पटवारी माधव सिंह चंदेल की सजा को बरकरार रखते हुए उसकी अवधि कम कर दी है। कोर्ट ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषसिद्धि में कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन मामले की पुरानापन और आरोपी की 73 वर्ष की उम्र को देखते हुए सजा में राहत दी है।
हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत दी गई एक साल की सजा को घटाकर 6 महीने कर दिया। वहीं धारा 13(1)(डी) सहपठित धारा 13(2) के तहत दो साल की सजा को घटाकर एक साल कर दिया गया है। मामले की सुनवाई जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच में हुई। मामला वर्ष 2003 में दुर्ग जिले का है। शिकायतकर्ता अर्जुन साहू ने एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) में शिकायत की थी कि जमीन के दस्तावेजों के सत्यापन और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े काम के लिए तत्कालीन पटवारी माधव सिंह चंदेल 2 हजार रुपए रिश्वत मांग रहा है। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने ट्रैप की योजना बनाई। 31 दिसंबर 2003 को शिकायतकर्ता ने पटवारी को 2 हजार रुपए दिए। इसके बाद एसीबी की टीम ने उसे पकड़ लिया। रिश्वत की रकम पर फिनॉल्फ्थेलिन पाउडर लगाया गया था। जांच के दौरान रासायनिक परीक्षण में भी इसकी पुष्टि हुई।
2017 में सुनाई गई थी तीन साल की सजा
मामले की सुनवाई के बाद निचली अदालत ने वर्ष 2017 में पटवारी को दोषी ठहराते हुए कुल तीन साल की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ पूर्व पटवारी ने हाईकोर्ट में अपील की थी। बचाव पक्ष ने दलील दी कि रिश्वत मांगने की बात पर्याप्त रूप से साबित नहीं हुई है। यह भी कहा गया कि ट्रैप के दौरान रकम पटवारी की जेब से नहीं, बल्कि उसके बैग से बरामद हुई थी। इसके अलावा रिश्वत की बातचीत रिकॉर्ड करने के लिए इस्तेमाल किए गए टेप रिकॉर्डर और उसकी ट्रांसक्रिप्शन भी अदालत में पेश नहीं की गई।
30 अक्टूबर को करना होगा सरेंडर
हालांकि मामले के 23 साल पुराने होने और आरोपी की वर्तमान उम्र 73 वर्ष होने समेत अन्य परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने सजा की अवधि कम कर दी। कोर्ट ने पूर्व पटवारी को 30 अक्टूबर 2026 को ट्रायल कोर्ट के समक्ष सरेंडर कर शेष सजा भुगतने का निर्देश दिया है।

