फ्लाईदुबई की उड़ान में भारतीय कैप्टन पर चाकू से नहीं कुल्हाड़ी से हुआ था हमला, इजरायली डॉक्टर ने बचाई जान

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      • कॉकपिट में मौजूद आपातकालीन कुल्हाड़ी बनी हमले का हथियार, ओमानी सह-पायलट पर गंभीर आरोप

      नई दिल्ली (एजेंसी)। दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड1073 में कॉकपिट के भीतर हुई हिंसक घटना ने विमानन सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उड़ान के दौरान ओमानी सह-पायलट ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर कॉकपिट में रखी आपातकालीन कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। हमले में कैप्टन के सिर और गर्दन पर गंभीर चोटें आईं और उनकी हालत नाजुक हो गई। इसी दौरान विमान में मौजूद एक इजरायली डॉक्टर ने तत्काल हस्तक्षेप कर घायल कैप्टन को जरूरी चिकित्सकीय सहायता दी, जिससे उनकी जान बचाई जा सकी।

          जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार हमलावर सह-पायलट ने बाहर से कोई चाकू या अन्य हथियार कॉकपिट में नहीं पहुंचाया था। उसने विमान के कॉकपिट में पहले से रखी आपातकालीन आग बुझाने वाली कुल्हाड़ी, जिसे ‘क्रैश एक्स’ कहा जाता है, का इस्तेमाल किया। यह उपकरण विमान में किसी हमले के लिए नहीं, बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों में यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा के लिए रखा जाता है। हमले के दौरान कैप्टन स्मित मच्छार को सिर और गर्दन पर गंभीर चोटें आईं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि विमान में मौजूद लोगों के बीच अफरातफरी मच गई। इसी समय एक इजरायली डॉक्टर ने स्थिति को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और घायल कैप्टन को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई। घटना के बाद विमान में तनावपूर्ण स्थिति बन गई थी। घायल कैप्टन को तत्काल मदद की जरूरत थी। विमान में यात्रा कर रहे इजरायली डॉक्टर ने अपनी चिकित्सकीय जानकारी का इस्तेमाल करते हुए कैप्टन को प्राथमिक उपचार दिया। इसके साथ ही अन्य लोगों की मदद से हमलावर सह-पायलट को काबू में किया गया। समय पर मिली चिकित्सा सहायता को कैप्टन की जान बचाने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

          क्यों रखा जाता है विमान में ‘क्रैश एक्स’?

          विमान में रखी आपातकालीन कुल्हाड़ी का उद्देश्य किसी व्यक्ति पर हमला करना नहीं है। इसे विमान में गंभीर आपात स्थिति से निपटने के लिए रखा जाता है। दुर्घटना की स्थिति में विमान का ढांचा क्षतिग्रस्त होकर मुड़ सकता है और कई बार सामान्य निकास द्वार मलबे या क्षतिग्रस्त हिस्सों के कारण बंद हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में चालक दल इस उपकरण की मदद से अवरोध हटाने और बाहर निकलने के लिए वैकल्पिक रास्ता बनाने का प्रयास कर सकता है। यह उपकरण विमान के अंदर किसी तकनीकी आपात स्थिति में भी उपयोगी होता है। कॉकपिट या विमान के किसी हिस्से में पैनल के पीछे आग लगने पर वहां सीधे पहुंचना मुश्किल हो सकता है। ऐसी स्थिति में आपातकालीन कुल्हाड़ी से पैनल हटाकर आग तक पहुंचने और उसे नियंत्रित करने में मदद ली जा सकती है।

          घटना ने विमानन सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

          फ्लाईदुबई की उड़ान में हुई इस घटना ने विमान के भीतर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। यात्रियों की सुरक्षा के लिए हवाई अड्डों पर बेहद कड़ी जांच की जाती है और छोटी से छोटी संदिग्ध वस्तु को भी रोक दिया जाता है। लेकिन कॉकपिट में पहले से मौजूद आपातकालीन उपकरण का चालक दल के ही किसी सदस्य द्वारा हिंसा में इस्तेमाल किया जाना सुरक्षा व्यवस्था के एक अलग पहलू को सामने लाता है। इस घटना के बाद विमानन क्षेत्र में इस बात पर चर्चा होना स्वाभाविक है कि चालक दल के सदस्यों की सुरक्षा जांच, पृष्ठभूमि संबंधी जानकारी और कॉकपिट में मौजूद आपातकालीन उपकरणों की सुरक्षा व्यवस्था को किस तरह और मजबूत किया जा सकता है। हालांकि, किसी भी नए सुरक्षा उपाय को तय करने के लिए घटना की विस्तृत जांच और उसके निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। फ्लाईदुबई की इस उड़ान में हुई घटना ने यह भी दिखाया कि विमान में मौजूद आपातकालीन उपकरण सामान्य परिस्थितियों में जीवन बचाने के लिए होते हैं, लेकिन असामान्य परिस्थितियों में उनका दुरुपयोग भी संभव है। ऐसे में विमानन सुरक्षा के लिए यात्रियों के साथ-साथ चालक दल और कॉकपिट की सुरक्षा को लेकर भी व्यापक दृष्टिकोण जरूरी माना जा रहा है।

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