कुसमुंडा खदान में दो ट्रेलरों की भिड़ंत, एक चालक की मौत, दूसरा गंभीर रूप से घायल

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      • केबिन में फंसे चालक को कर्मचारियों ने रेस्क्यू कर निकाला, मुआवजा और नौकरी की मांग पर बनी सहमति

      कोरबा (AkhandBharatHNKP.Com)। कुसमुंडा कोयला खदान में शनिवार दोपहर दो भारी ट्रेलरों की आमने-सामने भिड़ंत हो गई। हादसा इतना भीषण था कि एक ट्रेलर का चालक केबिन में बुरी तरह फंस गया। कर्मचारियों ने काफी मशक्कत के बाद उसे बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। हादसे में दूसरे ट्रेलर का चालक भी गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। मृतक चालक की पहचान विश्व प्रसाद बिट्टू, निवासी रेलिया गांव के रूप में हुई है। बताया गया कि वह पिछले कई महीनों से कंपनी में चालक के रूप में कार्यरत था।

          कुसमुंडा कोयला खदान

          जानकारी के अनुसार कुसमुंडा खदान में कोयला परिवहन का काम नीलकंठ कंपनी को मिला है। नीलकंठ कंपनी ने यह काम पीकेएस कंपनी को पेटी ठेके पर दे रखा है। शनिवार दोपहर दोनों कंपनियों के ट्रेलर खदान के भीतर कोयला परिवहन कर रहे थे। इसी दौरान दोनों वाहनों की आपस में जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर के बाद एक ट्रेलर का चालक केबिन के अंदर बुरी तरह फंस गया था। मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने तत्काल बचाव कार्य शुरू किया और काफी प्रयास के बाद उसे बाहर निकाला। हालांकि, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। दूसरे ट्रेलर का चालक भी हादसे में गंभीर रूप से घायल हुआ, जिसे तत्काल अस्पताल रवाना किया गया।

          मुआवजा और नौकरी की मांग पर हुआ समझौता

          हादसे की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में कर्मचारी और ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। लोगों ने खदान में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाते हुए कंपनी प्रबंधन के खिलाफ विरोध जताया। मृतक के परिजनों ने उचित मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग रखी। सूचना मिलने पर कुसमुंडा थाना प्रभारी मृत्युंजय पांडे पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाइश दी। कंपनी प्रबंधन की ओर से मुआवजा और नौकरी की मांग पर सहमति जताए जाने के बाद विरोध समाप्त हुआ।

          लगातार हादसों से सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

          कुसमुंडा खदान में हादसों का सिलसिला पहले भी सामने आता रहा है। लगातार हो रही दुर्घटनाओं को लेकर कर्मचारियों और स्थानीय लोगों में चिंता है। उनका आरोप है कि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई बार सवाल उठाए जाने के बावजूद खदान में पर्याप्त सुधार नहीं किया गया है। ताजा हादसे ने एक बार फिर खदान की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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