सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर पर सुनवाई 17 नवंबर को, याचिकाकर्ता को जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन की मोहलत

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      • चुनाव आयोग ने हलफनामे में आरोपों को किया खारिज, मतदाता सूची में संशोधन और आयोग की कार्यप्रणाली पर उठे सवालों पर होगी आगे सुनवाई

          नई दिल्ली (एजेंसी)। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई। अदालत ने मुख्य मामले में याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह को चुनाव आयोग के जवाब पर हलफनामा दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया है। वहीं, सांसद डोला सेन की याचिका पर चुनाव आयोग को भी अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने के लिए 10 दिन की मोहलत दी गई है। मामले की अगली सुनवाई अब 17 नवंबर को होगी।

          चुनाव आयोग ने अदालत में दाखिल 248 पन्नों के हलफनामे में आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि एसआईआर से संबंधित सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए थे। हलफनामे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के हस्ताक्षर हैं। चुनाव आयोग ने कहा कि एसआईआर के दौरान फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आयोग के मुताबिक, नियमों के तहत इसमें बदलाव करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि बिहार में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बिना फॉर्म-6 में बदलाव किए गए।

          मतदाताओं के सत्यापन पर आयोग की सफाई

          आयोग ने स्पष्ट किया कि जिन मतदाताओं के नाम पुरानी मतदाता सूची से नहीं जुड़ पाए हैं, उनके आवश्यक दस्तावेज बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) घर जाकर जुटाएंगे और उन्हें ऑनलाइन अपलोड करेंगे। ऐसे मतदाताओं को सामान्य तौर पर सुनवाई के लिए कार्यालय बुलाने की जरूरत नहीं होगी। आवश्यकता पड़ने पर सुनवाई की जाएगी और जहां संभव होगा, ऑनलाइन व्यवस्था अपनाई जाएगी।आयोग ने यह भी कहा कि सक्षम चुनाव पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) के आदेश के बिना मतदाता सूची में किसी का नाम न जोड़ा जाएगा और न हटाया जाएगा।

          ईसीआईनेट की जांच के लिए विशेषज्ञ समिति

          चुनाव आयोग ने बताया कि ईसीआईनेट मंच की कार्यप्रणाली और नियमों के अनुपालन की जांच के लिए आईआईटी मद्रास तथा भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु के विशेषज्ञों की समिति बनाई गई है। आयोग ने यह भी कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया संविधान के तहत निर्धारित है और इसके लिए वही प्रक्रिया तथा आधार लागू होते हैं, जो सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने के मामले में होते हैं। आयोग के अनुसार, दशहरे की छुट्टियों के कारण फिलहाल संक्षिप्त जवाब दाखिल किया गया है। जरूरत पड़ने पर वह आरोपों पर विस्तृत जवाब भी पेश करेगा। अब 17 नवंबर को होने वाली सुनवाई में याचिकाकर्ताओं के जवाब और आयोग के अतिरिक्त हलफनामे के आधार पर मामले में आगे की कार्यवाही होगी।

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