अमेरिका के साथ संयुक्त सैन्य कार्रवाई की तैयारी, मिडिल ईस्ट में एक बार फिर बढ़ा तनाव
तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन (एजेंसी)। मिडिल ईस्ट में एक बार फिर हालात तनावपूर्ण होते नजर आ रहे हैं। इजराइल अमेरिका के साथ मिलकर ईरान पर दोबारा सैन्य हमला करने की तैयारी में है। इजराइली मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कार्रवाई के लिए इजराइल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। इजराइली अधिकारियों का मानना है कि यदि हालात नहीं सुधरे तो आने वाले दिनों में क्षेत्र में सैन्य टकराव और तेज हो सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, इजराइल का कहना है कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। हालांकि वह नहीं चाहता कि उसके नागरिकों को फिर से बंकरों में शरण लेनी पड़े, लेकिन ईरान की गतिविधियों पर चुप रहना भी उसके लिए संभव नहीं है। ऐसे में जरूरत पड़ने पर दोबारा हमला किया जा सकता है। अमेरिका ने मंगलवार और बुधवार देर रात ईरान के कई इलाकों में हवाई हमले किए। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागीं। हालांकि इन देशों ने दावा किया कि उनकी वायु रक्षा प्रणाली ने कई मिसाइलों और ड्रोन को रास्ते में ही मार गिराया। ईरान ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका ने उत्तरी ईरान में चीन और रूस से जुड़े एक रणनीतिक रेलवे पुल पर क्रूज मिसाइल से हमला किया है। वहीं बुशहर परमाणु संयंत्र के आसपास भी हवाई हमले की खबर सामने आई, हालांकि ईरानी अधिकारियों के मुताबिक परमाणु सुविधा को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ी चिंता, तेल बाजार में हलचल
अमेरिका-ईरान तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। रॉयटर्स के अनुसार होर्मुज स्ट्रेट से तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। वहीं अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने संभावित नौसैनिक नाकाबंदी की आशंका के बीच एक ही रात में करीब 1 करोड़ बैरल कच्चा तेल और फ्यूल ऑयल निर्यात के लिए रवाना कर दिया।
अमेरिका बोला- बातचीत का रास्ता अब भी खुला
तनाव के बीच अमेरिका ने कहा है कि वह अब भी ईरान के साथ कूटनीतिक समाधान चाहता है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार दोनों देशों के बीच तकनीकी स्तर पर बातचीत जारी है और क्षेत्रीय मध्यस्थ तनाव कम कराने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया कि गुरुवार को ईरान में हुए कुछ ताजा धमाकों में अमेरिकी सेना की कोई भूमिका नहीं थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इजराइल को अमेरिका का खुला समर्थन मिल जाता है तो क्षेत्र में एक बार फिर बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत हो सकती है। वहीं ईरान ने भी साफ संकेत दिए हैं कि किसी भी नए हमले का जवाब पहले से अधिक कड़ा दिया जाएगा। ऐसे में मिडिल ईस्ट में हालात फिलहाल बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।

