कोल लेवी घोटाले में दावा : पार्टी फंड के नाम पर रामगोपाल ने जुटाए 800 करोड़, EOW ने कोर्ट में पेश किए दस्तावेज

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      • रामगोपाल अग्रवाल पर फंड प्रबंधन और हवाला नेटवर्क से दिल्ली रकम भेजने का आरोप, 17 जुलाई तक रिमांड पर भेजा गया

      रायपुर (AkhandBharatHNKP.Com)। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोल लेवी घोटाले की जांच में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने कांग्रेस के पूर्व प्रदेश कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ कई गंभीर दावे किए हैं। जांच एजेंसी ने विशेष अदालत में पेश दस्तावेजों में आरोप लगाया है कि कथित तौर पर ‘पार्टी फंड’ के नाम पर करीब 800 करोड़ रुपये एकत्र किए गए, जिनके संग्रहण और प्रबंधन में रामगोपाल अग्रवाल की अहम भूमिका थी।

          रामगोपाल अग्रवाल

          ईओडब्ल्यू के अनुसार, कथित घोटाले से जुड़ी रकम बोरी और कार्टन में भरकर कांग्रेस भवन लाई जाती थी, जहां से हवाला नेटवर्क के जरिए दिल्ली भेजी जाती थी। एजेंसी का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी रामगोपाल अग्रवाल करते थे। जांच एजेंसी ने अदालत में बताया कि कांग्रेस के अकाउंटेंट और रामगोपाल अग्रवाल के निजी सहायक देवेंद्र डड़सेना ने अपने बयान में कथित तौर पर कहा है कि कोल लेवी की राशि कांग्रेस भवन पहुंचती थी और उसके बाद उसका नियंत्रण रामगोपाल अग्रवाल के पास रहता था। ईओडब्ल्यू का यह भी दावा है कि कोल लेवी से प्राप्त 52 करोड़ 62 लाख 20 हजार रुपये सीधे रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचे, जिनका संग्रहण, प्रबंधन और उपयोग उनके माध्यम से किया गया।जांच एजेंसी के मुताबिक, भिलाई के कारोबारी लक्ष्मीनारायण बंसल उर्फ पप्पू ने अपने बयान में दीपेन चावड़ा के माध्यम से करीब 800 करोड़ रुपये कांग्रेस भवन भेजे जाने की बात कही है। वहीं, कारोबारी निखिल चंद्राकर ने भी कथित तौर पर कोल लेवी की राशि रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचने की जानकारी अपने बयान में दी है।

          फरारी के दौरान आठ राज्यों में रहे

          ईओडब्ल्यू की पूछताछ में रामगोपाल अग्रवाल ने बताया कि रायपुर छोड़ने के बाद वे ओडिशा, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, राजस्थान, मध्यप्रदेश और दिल्ली सहित आठ राज्यों में रहे। इस दौरान उन्होंने पुरी, वाराणसी और प्रयागराज जैसे धार्मिक स्थलों के दर्शन किए और विशेष पूजा-अर्चना भी कराई। जांच एजेंसी का दावा है कि फरारी के दौरान भी वे परिवार, कुछ नेताओं और कारोबारियों के संपर्क में बने रहे।

          आयकर छापे से खुला था मामला

          जांच एजेंसी के अनुसार, 30 जून 2022 को कोल कारोबारी सूर्यकांत तिवारी और उसके कथित सिंडिकेट पर आयकर विभाग की छापेमारी में बरामद दस्तावेजों और डायरी से अवैध कोल लेवी के लेन-देन का खुलासा हुआ था। इन्हीं दस्तावेजों में रामगोपाल अग्रवाल का नाम सामने आने के बाद ईडी की रिपोर्ट के आधार पर ईओडब्ल्यू ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। बाद में 8 जुलाई 2026 को रामगोपाल अग्रवाल ने आत्मसमर्पण किया। विशेष अदालत ने ईओडब्ल्यू की मांग पर रामगोपाल अग्रवाल को 17 जुलाई तक रिमांड पर भेज दिया है। जांच एजेंसी का कहना है कि पूछताछ के आधार पर कस्टम मिलिंग, डीएमएफ और शराब घोटाले से जुड़े मामलों में भी आगे कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी मामले में अलग से जांच आगे बढ़ाने की तैयारी में है।

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