बिलासपुर (AkhandBharatHNKP.Com)। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) की मुख्य परीक्षा की उत्तरपुस्तिका से चार पन्ने गायब मिलने के मामले में हाईकोर्ट ने आयोग को कड़ी फटकार लगाई है। जस्टिस पीपी साहू की पीठ ने अभ्यर्थी नारायण दत्त को 50 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। आयोग के अधिकारियों को तीन महीने के भीतर राशि का भुगतान करना होगा।
बिलासपुर निवासी नारायण दत्त ने वर्ष 2018 में राज्य सेवा परीक्षा के लिए आवेदन किया था। प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद वे मुख्य परीक्षा में शामिल हुए, लेकिन चयनित नहीं हो सके। इसके बाद उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत अपनी उत्तरपुस्तिका की प्रति मांगी। जांच में पता चला कि सामान्य अध्ययन-5 के भाग-2 में पृष्ठ क्रमांक 17 से 20 तक गायब थे। इन पन्नों पर प्रश्न क्रमांक 9 से 12 तक के उत्तर लिखे गए थे, जिनके कुल अंक 30 थे। अभ्यर्थी ने 5 फरवरी 2021 को अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिलने पर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान आयोग ने बताया कि मूल्यांकनकर्ता ने 27 सितंबर 2019 को ही उत्तरपुस्तिका के पन्ने गायब होने की जानकारी दे दी थी। आयोग का तर्क था कि यदि अभ्यर्थी को पूरे 30 अंक भी मिल जाते, तब भी उसके कुल अंक 725.5 होते, जबकि अनारक्षित वर्ग के अंतिम चयनित अभ्यर्थी के 737.5 अंक थे। अभ्यर्थी को वास्तविक रूप से 695.5 अंक मिले थे।
जांच नहीं कराने पर कोर्ट ने जताई नाराजगी
हाईकोर्ट ने कहा कि चयन की संभावना नहीं होने का तर्क देकर आयोग अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। पन्ने गायब होने की जानकारी मिलने के बावजूद अभ्यर्थी को सूचित नहीं किया गया और न ही जिम्मेदार व्यक्ति का पता लगाने के लिए ठोस कदम उठाए गए। कोर्ट ने माना कि आयोग की इस लापरवाही से अभ्यर्थी को मानसिक परेशानी हुई। साथ ही, जानकारी जुटाने और मुकदमा लड़ने में भी उसे खर्च उठाना पड़ा। इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने अभ्यर्थी को 50 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया और संबंधित अधिकारियों को तीन महीने के भीतर भुगतान करने के निर्देश दिए।
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