अब 6 साल पूरे होने पर ही मिलेगा पहली कक्षा में प्रवेश, सरकार ने जारी किए नए नियम

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      • राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत बड़ा फैसला, नए शैक्षणिक सत्र से सभी सरकारी और निजी स्कूलों में लागू होगी व्यवस्था

      रायपुर (AkhandBharatHNKP.Com)। छत्तीसगढ़ सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए कक्षा पहली में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु 6 वर्ष निर्धारित कर दी है। यह नई व्यवस्था आगामी शैक्षणिक सत्र से राज्य के सभी शासकीय, अशासकीय (निजी) और अनुदान प्राप्त विद्यालयों में लागू होगी। स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं।

          जारी निर्देशों के अनुसार संबंधित शैक्षणिक सत्र की 1 अप्रैल को बच्चे की आयु के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत नर्सरी (बालवाटिका-1) में प्रवेश के लिए आयु 3 से 4 वर्ष, केजी-1 (बालवाटिका-2) के लिए 4 से 5 वर्ष, केजी-2 (बालवाटिका-3) के लिए 5 से 6 वर्ष तथा कक्षा पहली के लिए 6 से 7 वर्ष निर्धारित की गई है। सरकार का उद्देश्य फाउंडेशनल स्टेज को मजबूत बनाना और पूरे प्रदेश में प्रवेश प्रक्रिया में एकरूपता लाना है। अभिभावकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने आयु सीमा में अधिकतम तीन माह की विशेष छूट भी दी है। यदि कोई बच्चा 1 अप्रैल तक निर्धारित आयु पूरी नहीं कर पाता, लेकिन 1 जुलाई तक उसकी आवश्यक आयु पूर्ण हो जाती है, तो उसे संबंधित कक्षा में प्रवेश दिया जा सकेगा।

          सरकारी, निजी और आरटीई प्रवेश पर भी लागू होंगे नियम

          नई व्यवस्था प्रदेश के सभी सरकारी, निजी और अनुदान प्राप्त विद्यालयों पर समान रूप से लागू होगी। इसके साथ ही शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में आरक्षित 25 प्रतिशत सीटों पर होने वाले प्रवेशों में भी यही आयु सीमा प्रभावी रहेगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जो विद्यार्थी किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय की पूर्व-प्राथमिक कक्षा उत्तीर्ण कर सीधे कक्षा पहली में प्रवेश ले रहे हैं, उन पर यह नई आयु सीमा लागू नहीं होगी। ऐसे मामलों में विद्यालय उनके स्थानांतरण प्रमाण-पत्र (टीसी), अंकसूची या स्कोर कार्ड में दर्ज जन्मतिथि के आधार पर प्रवेश देंगे।

          सख्ती से पालन कराने के निर्देश

          स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि विकासखंड शिक्षा अधिकारियों, संकुल समन्वयकों और शाला प्रमुखों के माध्यम से नए नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए। साथ ही अभिभावकों को नई व्यवस्था की जानकारी देने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा।

          छत्तीसगढ़ में बदलेगा स्कूलों का शैक्षणिक कैलेंडर, 1 अप्रैल से शुरू होगा नया सत्र

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