रायपुर (AkhandBharatHNKP.Com)। छत्तीसगढ़ में 1 मई से शुरू होने जा रही जनगणना ड्यूटी को लेकर शिक्षकों में नाराजगी बढ़ गई है। शिक्षकों ने इस फैसले का विरोध करते हुए इसे अव्यवहारिक और परेशानी भरा बताया है। उनका कहना है कि मई-जून की तपती गर्मी में घर-घर जाकर सर्वे करना बेहद कठिन होगा। एक ओर स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश रहेगा, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों को फील्ड में भेजा जा रहा है।

छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने कहा कि मौसम की परिस्थितियों को नजरअंदाज कर यह निर्णय लिया गया है। तेज गर्मी में लंबे समय तक बाहर रहकर डोर-टू-डोर सर्वे करना न केवल मुश्किल है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी जोखिम भरा साबित हो सकता है। शिक्षक संघ ने शासन से मांग की है कि जनगणना ड्यूटी के समय और पूरी प्रक्रिया पर पुनर्विचार किया जाए, ताकि शिक्षकों को अनावश्यक परेशानी न झेलनी पड़े। जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों के लिए एंड्रॉयड मोबाइल में कम से कम 12.0 वर्जन का सॉफ्टवेयर अनिवार्य किया गया है। ऐसे में जिन कर्मचारियों के पास पुराने मोबाइल हैं, उन्हें नया स्मार्टफोन खरीदना पड़ सकता है, जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ेगा।
1 मई से शुरू होगा पहला चरण
छत्तीसगढ़ में जनगणना 2027 का पहला चरण 1 मई से 30 मई 2026 तक चलेगा। इस दौरान ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस’ के तहत हर परिवार, मकान और बुनियादी सुविधाओं का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। कर्मचारी तय समय में घर-घर जाकर जानकारी जुटाएंगे। इस बार जनगणना प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी। 16 अप्रैल से 30 अप्रैल तक लोग ऑनलाइन पोर्टल के जरिए स्वयं भी अपने घर और परिवार की जानकारी भर सकेंगे। इसे सेल्फ एन्यूमरेशन नाम दिया गया है। ऑनलाइन जानकारी भरने वालों को एक यूनिक आईडी मिलेगी, जिसे बाद में कर्मचारियों को दिखाना होगा।
33 सवालों के जरिए जुटेगी जानकारी
जनगणना के इस चरण में मकान की स्थिति, उपयोग, निर्माण की गुणवत्ता, परिवारों की संख्या और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े 33 सवाल पूछे जाएंगे। पेयजल, शौचालय, बिजली, कुकिंग फ्यूल, इंटरनेट, टीवी-रेडियो जैसी सुविधाओं के साथ घर में रहने वाले लोगों और उपयोग किए जाने वाले वाहनों का भी विवरण दर्ज किया जाएगा।

