भारत सरकार के राजपत्र में अधिसूचित होने वाली पहली कोल पीएसयू की सीएसआर योजना बनी ‘एसईसीएल के सुश्रुत’

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      बिलासपुर (AkhandBharatHNKP.Com)। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की प्रमुख कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) योजना ‘एसईसीएल के सुश्रुत’ ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार के कोयला मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के साथ यह भारत सरकार के राजपत्र में अधिसूचित होने वाली किसी भी कोल पीएसयू की पहली सीएसआर योजना बन गई है।

          कोयला मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार अब इस योजना के लाभार्थियों के लिए आधार प्रमाणीकरण की सुविधा उपलब्ध होगी। यह व्यवस्था आधार अधिनियम-2016 एवं आधार प्रमाणीकरण नियम-2020 के तहत लागू की गई है। इससे योजना के लाभों का पारदर्शी, लक्षित और तकनीक आधारित वितरण सुनिश्चित होगा। वहीं, आधार प्रमाणीकरण नहीं कराने वाले लाभार्थियों के लिए सरकार द्वारा मान्य वैकल्पिक पहचान पत्रों के माध्यम से भी लाभ प्राप्त करने की व्यवस्था रहेगी। वर्ष 2023 में शुरू की गई ‘एसईसीएल के सुश्रुत’ योजना के तहत एसईसीएल के परिचालन क्षेत्रों के मेधावी विद्यार्थियों को नीट (NEET) परीक्षा की नि:शुल्क आवासीय कोचिंग प्रदान की जाती है, ताकि वे चिकित्सा क्षेत्र में अपना भविष्य बना सकें।

          70 विद्यार्थियों ने NEET में पाई सफलता

          योजना ने शुरुआत से ही उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। प्रथम बैच (2023-24) में 40 में से 39 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा उत्तीर्ण की। इनमें 11 विद्यार्थियों ने एमबीबीएस सहित विभिन्न चिकित्सा पाठ्यक्रमों में सरकारी संस्थानों में प्रवेश प्राप्त किया। वहीं, दूसरे बैच (2024-25) में 40 में से 31 विद्यार्थियों ने सफलता हासिल कर एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस और अन्य पाठ्यक्रमों में सरकारी कॉलेजों में प्रवेश सुनिश्चित किया।

          ‘एसईसीएल के सुश्रुत’ को मिली नई पहचान

          गौरतलब है कि ‘एसईसीएल के सुश्रुत’ इससे पहले भारत सरकार के डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) पोर्टल पर सूचीबद्ध होने वाली किसी भी कोल पीएसयू की पहली और एकमात्र सीएसआर योजना भी बन चुकी है। एसईसीएल प्रबंधन का मानना है कि भारत सरकार के राजपत्र में अधिसूचना के बाद योजना को और अधिक मजबूत संस्थागत आधार मिलेगा, जिससे लाभार्थियों तक पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक-सक्षम सेवा वितरण को नई गति मिलेगी।

          एसईसीएल मुख्यालय में भू-जल संरक्षण पर कार्यशाला संपन्न, विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

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