कोरबा (AkhandBharatHNKP.Com)। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में भारी मात्रा में कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों और बड़ी इकाइयों को अब अपने यहां निकलने वाले कचरे के उचित प्रबंधन और निस्तारण की जिम्मेदारी खुद उठानी होगी। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के तहत बल्क वेस्ट जनरेटरों के लिए नए नियम लागू कर दिए गए हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य होगा।
नगर पालिक निगम कोरबा के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय तिवारी ने बताया कि भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 27 जनवरी 2026 को अधिसूचना जारी की गई थी। इसके बाद 1 अप्रैल 2026 से ये नियम प्रभावी कर दिए गए हैं। यह नियम शहरी निकायों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी लागू होंगे। नए नियमों के तहत ऐसे संस्थान बल्क वेस्ट जनरेटर माने जाएंगे जिनका क्षेत्रफल 20 हजार वर्गमीटर या उससे अधिक हो, प्रतिदिन 40 हजार लीटर पानी की खपत होती हो या रोजाना 100 किलो या उससे अधिक ठोस कचरा निकलता हो। इसमें सरकारी विभाग, निजी कंपनियां, स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, होटल, अस्पताल, मॉल, मल्टीप्लेक्स, औद्योगिक इकाइयां, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, विवाह भवन, बाजार, स्टेडियम, पर्यटन स्थल और बड़ी आवासीय सोसायटी शामिल हैं।
डस्टबिन रखना अनिवार्य
इन सभी संस्थानों को सूखा, गीला और अन्य प्रकार के कचरे के लिए अलग-अलग डस्टबिन रखना होगा। कचरे का पृथक्करण कर उसे निर्धारित स्थान, कंटेनर या नगर निगम के वाहन में देना होगा। इसके लिए संबंधित संस्थानों को यूजर चार्ज भी जमा करना होगा। सड़क किनारे व्यवसाय करने वाले विक्रेताओं को भी अपने कार्य के दौरान निकलने वाले खाद्य अपशिष्ट, डिस्पोजल सामग्री, रैपर, नारियल के खोल, बचा हुआ भोजन, सब्जी और फलों के अवशेष के लिए अलग कंटेनर रखना जरूरी होगा।
आयोजन की सूचना 3 दिन पहले देना आवश्यक
नए नियमों के अनुसार 100 से अधिक लोगों के किसी भी आयोजन या समारोह के लिए कम से कम 3 कार्य दिवस पहले स्थानीय निकाय को सूचना देना जरूरी होगा। आयोजकों को कार्यक्रम स्थल पर कचरे का पृथक्करण कर उसका नियमानुसार निस्तारण भी सुनिश्चित करना होगा। नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी बल्क वेस्ट जनरेटरों को नियमों का पालन करना होगा। नियम तोडऩे वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

